दुष्कर्म पीड़िता की काउंसलिंग के लिए शुरू हुई ‘पहल’(पीपुल अवैकिंग अगेंस्ट हरैशमेंट एंड असॉल्ट इन लखनऊ) अब फेसबुक पर भी दिखेगी।
महिला अपराध के खिलाफ अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने के मकसद से राजधानी पुलिस ने सोशल नेटवर्किंग साइट को जरिया बनाया है।
गत दिनों ‘पहल’ को परिणाम तक पहुंचाने की कवायद के तहत हुई परिचर्चा में कुछ रणनीतियां बनाई गईं थीं। उन्हीं में से एक थी कि अधिक से अधिक लोगों, खासकर युवाओं को ‘पहल टीम’का हिस्सा बनाना।
रणनीतियों को अमली जामा पहनाने की शुरुआत फेसबुक पर जुड़ने के साथ हुई है। टीम की नोडल ऑफिसर बबीता सिंह कहती हैं कि परिचर्चा में यह तय हुआ था कि सभी लोग एक दूसरे से लगातार जुड़ें अपने सुझाव देते रहें।
साथ ही लखनऊ में महिला अपराधों के विषय में जो भी सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं,एक दूसरे से साझा करते रहे। इसी उद्देश्य से ‘पहल’को अब फेसबुक से जोड़ा गया है।
हर वारदात की रिपोर्ट दर्ज करने का दावा करने वाली राजधानी पुलिस ने बीते वर्ष दुष्कर्म के मुकदमे दर्ज करने में खेल किया था। ‘पहल’से संबंधित पत्रकार वार्ता में पुलिस की आंकड़ों की बाजीगरी का खुलासा हुआ।
एएसपी गौरव सिंह की मौजूदगी में‘पहल’से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ संगीता शर्मा दुष्कर्म पीड़िताओं की काउंसिलिंग व पहल के फेसबुक से जुड़ने की पत्रकारों को जानकारी दे रही थी।
इस दौरान बताया कि जून 13 में गठित‘पहल’की टीम ने एक जनवरी से 31 दिसंबर 2013 तक जिले में 127 दुष्कर्म पीड़िताओं से संपर्क किया।
मनोबल बढ़ाने के साथ दरिंदों के खिलाफ संघर्ष को तैयार किया। सवाल उठा कि पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक,वर्ष 2013 में दुष्कर्म के 83 मामले दर्ज हुए थे।
ऐसे में ‘टीम ने 127 पीड़िताओं से किस तरह संपर्क किया? डॉ संगीता ने कहा कि दुष्कर्म का मामला पुलिस के पास पहुंचते ही संबंधित थाने द्वारा टीम को सूचना दी जाती है।
साल भर में 127 मामले संबंधित थानों द्वारा‘पहल’को बताए गए। आंकड़ों में खासे अंतर को लेकर सवाल उठते देख एएसपी ने मामले की जांच की बात कहकर मामला शांत कराया।