इंजीनियर: बिजली विभाग की चेकिंग बहुत तेज चल रही है, तो फिर आप लोगों ने क्या प्लान किया?
उपभोक्ता: मेरे मैकेनिकल मीटर में क्या प्रॉब्लम है?
इंजीनियर: आपके यहां सभी में प्रॉब्लम ही प्रॉब्लम है। मैकेनिकल मीटर से बिजली जला रहे हो जो।
उपभोक्ता: तो फिर मीटर चेंज हो जाए और बात खत्म हो जाएगी।
इंजीनियर: हम कंप्लेन पर जांच करने आए हैं। मैकेनिकल मीटर से बिजली जलाने पर पेनाल्टी लगेगी?
उपभोक्ता: हमने बिजली तो मीटर से ही जलाई है कोई कटिया थोड़ी मारी।
इंजीनियर: तुम्हारी रिपोर्ट भर देते हैं, चार लाख पेनाल्टी जमा कर देना। पेनाल्टी दूसरे लोग लगाते हैं।
उपभोक्ता: थोड़ा रुक जाइए।
इंजीनियर: रुकने की भी एक टाइमिंग होती है। इसके बाद हम कुछ कर नहीं पाएंगे।
उपभोक्ता: आपने जितनी बड़ी रकम कही उसे जुटाना बहुत मुश्किल है। हम रोज कमाने-खाने वाले हैं।
इंजीनियर: आपके यहां बहुत बिजली का सामान चल रहा है, कहीं न कहीं कोई फाल्ट जरूर है।
उपभोक्ता: 4000-5000 रुपये में काम चला लें।
इंजीनियर: तुम्हारी रिपोर्ट भर देते हैं, हो सकता इससे कम ही जुर्माना हो।
उपभोक्ता: 10,000 से 15000 से काम चला लीजिए।
इंजीनियर: नहीं, नहीं।
उपभोक्ता: आप रिपोर्ट ऐसी लगा देंगे तो जुर्माना कम नहीं होगा।
इंजीनियर: हमारे हाथ में सबकुछ होता है, तो हम कर देते हमारी भी कुछ मजबूरी है।
उपभोक्ता: आप चाहेंगे तो कम हो जाएगा।
इंजीनियर: जितना बताया था, उसमें से 10,000- 5000 कम कर दो।
उपभोक्ता: सब कुछ तो लोन पर है, बहुत मुश्किल है।
इंजीनियर उगाही के लिए बात करने उपभोक्ता के घर पहुंचा। इस दौरान परिवार ने बातचीत रिकॉर्ड कर विभाग के अफसर को बिजली बिल के साथ भेज दी। वहीं, इंजीनियर अपने विभाग के प्रति भी वफादार नहीं है। उसे तुरंत मैकेनिकल मीटर बदल कर राजस्व इकाई को रिपोर्ट भेजनी चाहिए थी। रिकॉर्डिंग में इंजीनियर यह भी कह रहा था कि वह रकम कम नहीं कर सकता। संभव है कि किसी बड़े अफसर के इशारे पर यह खेल चल रहा हो।
मैकेनिकल मीटर से बिजली जलाना अपराध नहीं
सर्किल सात के अधीक्षण अभियंता मनीष कुमार अग्रवाल ने कहा कि मैकेनिकल मीटर से बिजली जलाना कोई अपराध नहीं है। हालांकि, उपभोक्ता को इसे बदलवाने की खुद पहल करनी चाहिए। इसका न शुल्क लगता और न ही जुर्माना। बशर्ते मीटर में कोई गड़बड़ी न की गई हो।
मामले पर मुख्य अभियंता लेसा सिस गोमतीनगर मधुकर वर्मा का कहना है कि चेकिंग टीम मैकेनिकल या कोई भी मीटर बदलने के नाम पर प्रताड़ित कर रही है तो उपभोक्ता को थाने में उसके खिलाफ केस दर्ज कराना चाहिए। इसके बाद अलग से विभागीय कार्रवाई भी होगी।