लखनऊ पब्लिक स्कूल (एलपीएस) के संस्थापक सदस्य चंद्रपाल सिंह उर्फ सीपी सिंह हत्याकांड के हाईप्रोफाइल मामले में अपर सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार ने पूर्व एमएलसी एसपी सिंह सहित चारों आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
करीब आठ साल पहले सीपी सिंह की आशियाना क्षेत्र में एलपीएस के गेट के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
इस हत्याकांड में पूर्व एमएलसी शिवपाल सिंह उर्फ एसपी सिंह के अलावा शिव बहादुर उर्फ शिवा, रणवीर सिंह उर्फ नीलू उर्फ राना और आनंद कुमार उर्फ अनंत वर्मा आरोपी बनाए गए थे।
एसपी सिंह सुप्रीम कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद पौने छह साल से जेल में बंद थे।
2006 में हुई थी सीपी सिंह की हत्या
अभियोजन के मुताबिक, एलपीएस के संस्थापक सदस्य चंद्रपाल सिंह 21 सितंबर 2006 को अपनी बोलेरो से एलपीएस की सेक्टर-डी ब्रांच से सेक्टर-आई शाखा जा रहे थे।
वहां एलपीएस के गेट पर गाड़ी रुकते ही बाइक सवार दो शूटरों ने उन पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी। बोलेरो चालक नरेश चावला के माजरा समझने से पहले ही हमलावर फरार हो गए।
स्कूल के कर्मचारियों ने सीपी सिंह को सिविल अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सीपी सिंह के भाई वीरेंद्र सिंह की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज करके तहकीकात शुरू की गई।
इसमें सामने आया कि शूटर रणवीर सिंह और आनंद कुमार ने वारदात को अंजाम दिया था। अगले ही दिन गाजीपुर के एक मुकदमे में जारी वारंट पर इन दोनों ने आत्मसमर्पण कर दिया और जेल चले गए थे।
पुलिस ने दोनों को कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की और वारदात में इस्तेमाल पिस्टल बरामद करने का दावा किया।
चारों आरोपियों पर लगे थे गैंगेस्टर एक्ट
इसके बाद पुलिस ने तत्कालीन एमएलसी एसपी सिंह व शिव बहादुर उर्फ शिवा को सीपी सिंह हत्याकांड की साजिश रचने के आरोप में 27 दिसंबर 2006 को गिरफ्तार किया।
तफ्तीश पूरी करके पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया और चारों पर गैंगेस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
एसपी सिंह को 8 मार्च 2007 को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। इसके खिलाफ सीपी सिंह के परिवारीजनों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
जमानत खारिज होने पर एसपी सिंह ने 21 अक्तूबर 2008 को कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया था।
अपर सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार ने पत्रावली के अवलोकन, गवाहों के बयान और 19 जुलाई को दोनों पक्षों के वकीलों की बहस सुनने के बाद फैसला सोमवार के लिए सुरक्षित रख लिया था।
इस मुकदमे में अभियोजन ने 16 और बचाव पक्ष की ओर से चार गवाह पेश किए गए थे। मामले की तह तक जाने के लिए कोर्ट ने पांच गवाहों को अपने स्तर से बुलाया था।