रेमल स्वराज के नाम से सूबे के कई जनपदों में चिट-फंड कंपनी खोलकर जनता की रकम ठगने का मामला सामने आया है।
खुलासा तब हुआ जब शनिवार दोपहर शाहजहांपुर से आए कई लोगों ने कंपनी के डालीगंज स्थित ऑफिस पहुंच अपनी रकम वापस मांगी।
इन लोगों को रेमल इंडस्ट्रीज के नाम पर चपत लगाई गई थी बाद में कंपनी बंद हो गई। कंपनी ने प्रतिमाह 300 से 30,000 रुपये के रिकरिंग डिपॉजिट (आरडी) खुलवाने पर सालाना 12 प्रतिशत ब्याज सहित रकम वापस देने का दावा किया था।
शाहजहांपुर से आए वीरपाल सिंह,जलील अहमद,केशव ने बताया कि एजेंट छोटेलाल के कहने पर करीब एक साल पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल की रेमल इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी के अकाउंट में करीब सात लाख रुपये की आरडी कराई थी। छह महीने पहले कंपनी बंद हो गई।
अब अपनी रकम के लिए भटक रहे हैं। पीड़ितों ने बताया कि करीब चार माह पूर्व रेमल स्वराज के नाम से चिट-फंड कंपनी खोलकर फिर खेल करने का पता चला।
इस पर कंपनी का ऑफिस ढूंढ़ते हुए राजधानी पहुंचे। डालीगंज स्थित रेमल स्वराज कंपनी के ऑफिस पहुंचकर अपनी रकम वापस मांगी।
इस पर कंपनी के कर्मचारी झगड़ा करने लगे। मैनेजर राजेंद्र सिंह ने बताया कि रेमल इंडस्ट्रीज लिमिटेड दूसरी कंपनी थी, जिसके मालिक मालिक एके दत्ता हैं।
रेमल स्वराज पश्चिम बंगाल के कोलकाता निवासी रामेश्वर पोद्दार की है। पता चला कि रामेश्वर पोद्दार पहले एके दत्ता की कंपनी में ही पार्टनर था।
करीब छह माह पूर्व कोलकाता पुलिस ने एके दत्ता को जालसाजी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पोद्दार ने रेमल स्वराज नाम से दूसरी कंपनी शुरू की।
राजधानी के अलावा रेमल स्वराज कंपनी ने इलाहाबाद, मुरादाबाद, रायबरेली, बदायूं, लखीमपुर, सीतापुर, हरदोई, फर्रुखाबाद सहित कई जिलों में ऑफिस खोले हैं।
मैनेजर ने बताया कि कंपनी ने अपने एजेंट बना रखे हैं, जिनके माध्यम से आरडी कराई जा रही हैं।
हर एजेंट को एक आरडी खुलवाने पर दस प्रतिशत कमीशन मिलता है। बताते हैं कि कंपनी ने आरडी के रूप में करीब ढाई हजार लोगों से करोड़ों रुपये जमा करा रखे हैं।
कंपनी बैंकिंग गतिविधियां कर रही हैं, लेकिन इससे संबंधित कोई कागजात कंपनी के मैनेजर राजेंद्र सिंह नहीं दिखा सके।
हालांकि दावा किया कि कंपनी का रजिस्ट्रेशन है और आरबीआई से मान्यता भी जिसके कागजात जल्द उपलब्ध करा दिए जाएंगे।