चिनहट में शनिवार को महज एक मोबाइल के लिए युवक ने बहन के सिर पर गड़ासा से हमला किया। खून से लथपथ बहन को घसीटते हुए घर के बाहर लाया और चाकू से गोद डाला। परिवार और आसपास के लोगों ने छुड़ाने का प्रयास किया तो उनकी तरफ चाकू लेकर दौड़ पड़ा। कोई भी खून से सने युवक को रोकने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
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सूचना पर पहुंची पुलिस को उसे पकड़ने में पसीने छूट गए। उधर, अस्पताल ले जाने तक महिला ने दम तोड़ दिया। पुलिस के अनुसार, चिनहट के दयारामपुरवा निवासी प्रमोद जुग्गौर के बेलवा गांव स्थित बहन की ससुराल मां अलका को लेने आया था।
पिछले कुछ दिनों से मां इलाज कराने के लिए बेटी सुनीता (30) के घर आई हुई थी। बहनोई कमलेश गौतम सुबह काम पर निकल गया। सुनीता घर के काम निपटा रही थी। इसी दौरान उसका नया मोबाइल प्रमोद ने उठा लिया।
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भाई के वहशीपने को रहकर सब रह गए दंग
मां को लेकर जा रहे प्रमोद के हाथ में मोबाइल देख सुनीता ने वापस ले लिया। इस पर प्रमोद मोबाइल के लिए अड़ गया। मना करने पर आपे से बाहर होकर बहन को पीटने लगा। मां के साथ ही सुनीता के दोनों बच्चे भी मामा का उग्र रूप देख सहम गए। काफी कोशिश के बावजूद छुड़ा नहीं सके। इसी बीच बहन को घसीटते हुए घर के बाहर ले आया।
शोर सुनकर आसपास के लोग भी जुट गए। किसी के कुछ समझने से पहले प्रमोद घर से गंड़ासा उठा लाया और सुनीता के सिर पर वार कर दिया। खून से लथपथ होकर सुनीता के गिरते ही चीख पुकार मच गई। जबकि, बहन को मारने के बाद प्रमोद खून से सना गंड़ासा लेकर लोगों को धमकाने लगा।
इस दौरान कमलेश भी पहुंच गया और किसी तरह गंड़ासा छीना। इस पर प्रमोद चाकू उठा लाया और खून से लथपथ पड़ी बहन पर ताबड़तोड़ वार करने लगा। बीच गली में दरिंदे का रूप देख लोग सहम उठे और कोई उसे पकड़ने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
बहन की हत्या के बाद चेहरे में नहीं शिकन
सूचना पर पहुंची पुलिस को भी प्रमोद चाकू लहराकर धमकाता रहा। किसी तरह उसे पकड़ने के साथ ही पुलिस ने खून से सना गंड़ासा और चाकू कब्जे में लिया। इसके बाद खून से लथपथ महिला को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया जा सका, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
बहन की दरिंदगी से हत्या करने वाले प्रमोद के चेहरे पर जरा भी शिकन नजर नहीं थी। पुलिस के पूछने पर बोला कि काफी दिनों से बहन से चिढ़ता था। पता चला कि शादी के कुछ दिनों बाद ही प्रमोद की पत्नी मारपीट से तंग आकर छोड़कर चली गई थी। इसके लिए वह अपनी बहन और बहनोई को जिम्मेदार मानता था। कहा कि उन्हीं के भड़काने पर पत्नी छोड़कर गई थी।
मासूम भांजों की भी नहीं सुनी
सुनीता के बच्चे अमित (8) और सुमित (7) मामा प्रमोद को बहुत प्यार करते थे। दोनों मासूम सुबह भी मामा के साथ खेल रहे थे। उन्हें क्या पता था कि कुछ ही देर में मामा ही उनकी मां को मार डालेगा। दोनों अपनी मां को छोड़ने के लिए रोते हुए मिन्नत करते रहे लेकिन दरिंदे पर कोई असर न हुआ।
इतना ही नहीं मां अलका और सास नन्ही देवी भी तमाम कोशिश के बावजूद बचाने में नाकाम रहीं। पूरे परिवार के सामने ही उसने बेरहमी से बहन की हत्या कर दी। सगी बहन को गंड़ासे व चाकू से वार कर मारने वाले प्रमोद ने खुद को भी जान से मारने की कोशिश की।
पुलिस कर्मियों ने उसे पकड़ने के लिए घेराबंदी शुरू की तो उसने अपने शरीर पर भी चाकू से वार कर दिया। इससे वह खुद भी लहूलुहान हो गया। इससे वहां मौजूद पुलिस कर्मियों के भी हाथ पांव फूल गये। इस दौरान पुलिस कर्मियों व अन्य लोगों ने उसे काफी समझाने की कोशिश की। पुलिस कर्मियों ने उसे सकुशल दबोचने के बाद राहत की सांस ली।
प्रमोद को चिनहट कोतवाली के लॉकअप में डाला गया तो वह अपनी बहन का हाल जानने की कोशिश करने लगा। पूछने पर पुलिस कर्मियों ने उसे बताया कि उसकी मौत हो चुकी है तो वह फूट-फूटकर रोने लगा। बोला उसे अपने किए पर पछतावा है। गलती हो गई जो बहन पर कातिलाना हमला किया।
सुनीता मनोरोग से पीड़ित अपने भाई प्रमोद का इलाज कराना चाहती थी। पति व अन्य परिवारवालों की मदद से वह कई बार उसे लेकर अस्पताल भी गई। सुनीता अक्सर उसे समझाती थी और जरा-जरा सी बात पर उग्र हो जाने से मना करती थी।
इंस्पेक्टर चिनहट ने प्रमोद से जब पूछताछ शुरू की तो वह इन बातों का खुलासा करने लगा। रोते हुए बोला ‘जिसने मुझे सबसे ज्यादा प्यार किया मैने उसकी को मार डाला।’