उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर नकली शराब बनाई जा रही है। इस दारू को ब्रांडेड शराब की बोतलों में भरकर सस्ते दामों पर बेचा जा रहा है। इस काले कारोबार का सबसे बड़ा नेटवर्क हाईवे किनारे के जनपद हैं।
हाल ही में बड़ी तादाद में आबकारी विभाग के हालमार्क लगी बोतलें जब्त हुई हैं और ब्रांडेड बोतलों में नकली शराब के भरे जाने की पुष्टि भी छापों के दौरान खुद आबकारी अफसरों ने की है।
हाईवे किनारे इन केंद्रों पर पुलिस के खिलाफ मोर्चा संभालने के लिए माफियाओं ने महिलाओं की टीमें तक बना ली हैं।
विभागीय आंकड़े इस बात की भी तस्दीक करते हैं कि पिछले साल की तुलना में इस साल अंग्रेजी शराब की खपत में कमी दर्ज हुई है, और देशी शराब की खपत बढ़ी है।
लखनऊ में आबकारी विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि बड़े पैमाने पर कच्ची और नकली शराब के उत्पादन ने अंग्रेजी शराब की खपत को भी प्रभावित किया है, जबकि कुछ खास कस्बों में यही नकली शराब आकर्षक पैकिंग में लायसेंसी ठेकों पर धड़ल्ले से बिक रही है।
दिवाली के मौके पर प्रदेश में नकली शराब से संबंधित 5061 मुकदमे दर्ज हुए हैं, जबकि 94,960 लीटर अवैध शराब जब्त हुई है।
महिलाओं विंग बचा रही है माफियाओं को
आगरा, फीरोजाबाद, शिकोहाबाद में नकली शराब की मांग इतनी ज्यादा है कि यहां के अवैध उत्पादन केंद्र मांग पूरी नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए पास ही हरियाणा से भी सस्ती अवैध शराब की खपत हो रही है।
करीब पंद्रह दिन पहले कासगंज के नगला भंडारी गांव में नकली शराब से तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है। गाजियाबाद और बुलंदशहर में 30 छापों के दौरान सैकड़ों लीटर कच्ची शराब जब्त हो चुकी है।
वेस्ट यूपी में शराब माफियाओं ने महिला कानून का फायदा उठाते हुए महिलाओं की नई टीम बना दी है, जो पुलिस या आबकारी छापों के दौरान संघर्ष का मोर्चा संभाल लेती हैं।
मुरादाबाद, अमरोहा और फकीरपुरा में इन महिलाओं ने न केवल पुलिस पर हमला किया बल्कि छापे के दौरान पकड़े गए माफियाओं को भी छुड़ा लिया।
दूसरी तरफ इन महिलाओं ने पुलिस वालों पर जानलेवा हमला भी किया, जिन्हें इलाज के लिए बड़े शहरों में ले जाना पड़ा।