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फर्जी चेक से बैंक को लगाया 27 लाख का चूना

Fri, 01 Aug 2014 03:13 AM IST
हेमंत पांडेय/अमर उजाला, लखनऊ
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अलीगंज इलाके में एक जालसाज ने चेकों की क्लोनिंग कर आईसीआईसीआई बैंक को लाखों रुपये की चपत लगा दी। ठग ने एक बार नहीं बल्कि तीन बार फर्जी चेकों से लाखों रुपये निकाल लिए लेकिन बैंक के कर्मचारी इसे पकड़ नहीं पाए।
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ठगी का खुलासा होने के बाद बैंक के मैनेजर ने अलीगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। आईसीआईसीआई बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक एन दत्ता के अनुसार अजीमुद्दीन नाम के एक व्यक्ति ने नेशनल इंजीनियरिंग वर्क्स के नाम से बैंक की चंद्रलोक कॉलोनी अलीगंज शाखा में एक खाता खुलवाया।

बैंक खाते में अजीमुद्दीन ने पंजाब नेशनल बैंक के चेक से बीते 8 जून को 9 लाख 85 हजार 600 रुपये अपने खाते में डलवाये। फिर अगले ही दिन 9 लाख 75 हजार 200 रुपये का चेक भुनाया।
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बैंक अधिकारियों के उड़े होश

इसके अगले ही दिन 9 लाख 60 हजार 900 रुपये का एक और चेक भुना लिया। इस तरह अजीमुद्दीन ने तीन दिन में 29 लाख 21 हजार 600 रुपये डलवाए। चेक क्लीयर होने के बाद उसने बैंक से रकम निकलवा भी ली।

सूत्रों के अनुसार वह कुछ और चेक भुनाने की फिराक में था लेकिन तब तक बैंक को इसकी भनक लग गई। जब बैंक अधिकारियों ने इतनी भारी मात्रा में हो रहे ट्रांजेक्शन की जांच कराई तो उनके होश उड़ गए।

जांच में पता चला कि उसने फर्जी चेकों के जरिए बैंक को लाखों की चपत लगा दी। इसके बाद आईसीआईसीआई बैंक ने आनन-फानन में अजीमुद्दीन का अकाउंट फ्रीज कर दिया। बैंक में फिलहाल 11 लाख 57 हजार 696 रुपये बचे हुए हैं।

धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज

बैंक मैनेजर एन दत्ता की सूचना पर अलीगंज थाने में अजीमुद्दीन के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच कर रहे दरोगा जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि अजीमुद्दीन ने पंजाब नेशनल बैंक के चेकों की क्लोनिंग कर आईसीआईसीआई बैंक को लाखों रुपये की चपत लगाई है।

एक नजर में कोई भी इन चेकों को नहीं पकड़ सकता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस मामले में जालसाजी के रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए साइबर क्राइम एक्सपर्ट का सहारा लिया जाएगा।

दरअसल इस मामले में आईसीआईसीआई व पंजाब नेशनल बैंक के कर्मचारियों के बीच बैंकों की अपनी जांच और चेक क्लीयरिंग को लेकर ई-मेल भी किए गए थे। यही नहीं पुलिस सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से भी जालसाज के बारे में पता करेगी।

बैंक की लापरवाही का उठाया फायदा

बैंकों में इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग की सुविधा शुरू होने के बाद उसी दिन चेक क्लीयर हो जाते हैं। बैंक के कर्मचारी चेक स्केन कर उस बैंक को भेज देते हैं जहां से ट्रांजेक्शन होना होता है।

इसके बाद उक्त रकम खाताधारक के अकाउंट में ट्रांसफर कर देते हैं। सूत्रों के अनुसार सारा खेल इसी दौरान हुआ। जालसाज ने चेक की जांच पड़ताल में होने वाली इसी लापरवाही का फायदा उठाया होगा।

पुलिस के मुताबिक इस बात की भी जांच होगी कि बैंक के कर्मचारी भी तो इस जालसाजी में शामिल नही हैं। दरअसल चेकों की क्लोनिंग एक बड़ी समस्या है।
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बैंकों के लिए ठगी बनी मुसीबत

जब तक पुलिस को इस तरह की जालसाजी का पता चलता है अपराधी पुलिस की पकड़ से बहुत दूर निकल जाता है। क्लोन चेकों से ठगी बैंकों के लिए नई मुसीबत बन गई है।

ये चेक देखने में बिलकुल असली चेकों की तरह ही होते हैं। अकाउंट नंबर, खाताधारक के हस्ताक्षर की हूबहू नकल होती है। इसके जरिए जालसाज आसानी से धोखाधड़ी में सफल हो जा रहे हैं।

क्लोनिंग के लिए उच्च तकनीक के प्रिंटर व स्याही का इस्तेमाल होता है। इन चेकों को भुनवाने के लिए जालसाज बैंकों में अपना अकाउंट भी खुलवा लेते हैं।
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