लखनऊ के जानकीपुरम थाना क्षेत्र में शुक्रवार रात नशे में धुत मजदूर ने सौ रुपये के झगड़े में युवक पूरन को ईंट से कूंचकर मार डाला। शव खाली प्लॉट में फेंकने के बाद खुद फुटपाथ पर सो गया। शराब ठेके के सेल्समैन की अगुवाई में नागरिकों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले किया और रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस के मुताबिक, जानकीपुरम सचिवालय कॉलोनी के पीछे शराब ठेके के सेल्समैन कौशल जायसवाल ने झाड़ू-पोछा करने वाले पूरन (35) के शनिवार सुबह काम पर न पहुंचने पर तलाश शुरू की।
इंजीनियरिंग कॉलेज पर पूड़ी का ठेला लगाने वाले अनिल कुमार व सुनील से पता चला कि रघुवर लॉन के पास शुक्रवार रात पूरन का सौ रुपये को लेकर कुमार मांझी नामक मजदूर से झगड़ा हुआ था।
कौशल जायसवाल दोनों को साथ लेकर रघुवर लॉन के पास पहुंचा, जहां खाली प्लॉट में पूरन का शव पड़ा था। चेहरे पर खून जमा था और सिर पर गंभीर चोट के निशान थे। कौशल ने पुलिस को कॉल करने के साथ कुमार मांझी की तलाश शुरू की।
डेढ़ किलोमीटर तक पीछा करके पकड़ा
पता चला कि नशे में धुत कुमार मांझी रात में फुटपाथ पर सोया था और सुबह उसने पूड़ी का ठेला लगा रहे अनिल के पास जाकर पूरन से झगड़े की जानकारी दी थी। कौशल ने अनिल, सुनील, राजेश, बलवंत, दीपक की मदद से कुमार मांझी को करीब डेढ़ किमी. पीछा करके पकड़ा। वह उड़ीसा के जिला नयापारा के गांव अमौदी स्थित अपने मूलनिवास पर भाग निकलने की फिराक में था।
कत्ल पर भी लापरवाह पुलिस
सूत्रों ने जानकारी दी कि कुमार मांझी ने सुबह पांच बजे पूड़ी के ठेले पर जाकर अनिल को बताया कि शराब के नशे में रात में पूरन से झगड़ा हुआ था और उसने ईंट से वार करके पूरन की हत्या कर दी है।
अनिल ने इंस्पेक्टर जानकीपुरम के सीयूजी नंबर पर कॉल की। फोन रिसीव न होने पर उसने कुमार को बातों में उलझाए रखने के साथ रघुवर लॉन के मैनेजर वीरेंद्र कुमार को जानकारी दी।
इंस्पेक्टर द्वारा फोन रिसीव न किए जाने पर वीरेंद्र ने एसआई नंदलाल को कॉल की। वह दो सिपाहियों को लेकर सुबह 7:30 बजे मौके पर पहुंचे और इंस्पेक्टर को मामले की जानकारी दी। डेढ़ घंटे बाद इंस्पेक्टर जानकीपुरम फोर्स लेकर आए।
आरोपी को कुर्सी के पीछे छिपाए रहे एसआई
इंस्पेक्टर जानकीपुरम ने मातहतों को आदेश दिए कि नागरिकों द्वारा आरोपी को पकड़कर पुलिस को सौंपने की किसी को जानकारी नहीं होनी चाहिए।
पुलिस टीम द्वारा शाम को कुमार मांझी की गिरफ्तारी दर्शाई जाएगी। इंस्पेक्टर के आदेश पर एक दरोगा ने कुमार मांझी को अपनी कुर्सी के पीछे छिपा लिया।
प्रेस फोटोग्राफरों को दिन भर टालते रहे। वहीं, पुलिस ने पूरन के शव को कब्जे में लेने के साथ उसके परिवारीजनों के बारे में तहकीकात की। सीतापुर के रहने वाले पूरन का पूरा पता कोई नहीं बता सका।