रामजानकी के पति नरेश पासी की मौत हो चुकी है। उसके दो बच्चे हैं। वह छोटे-मोटे काम करके परिवार का पेट पालती थी। रामजानकी के गायब होने के बाद से दोनों बच्चे सुमित्रा के घर पर ही रह रहे थे।
पैर में पड़ी रॉड और हाथ के कड़े से हुई पहचान
क्षेत्राधिकारी ने बताया कि रामजानकी का शव पूरी तरह से कंकाल बन चुका था इसलिए पहचान मुश्किल थी। छह महीने शव मिट्टी में दबा होने के कारण कपड़े भी पहचान में नही आ रहे थे। उसके एक पैर में लोहे की रॉड पड़ी थी। हाथ में एक कड़ा था। पुलिस ने परिजनों को बुलवाया तो उन्होंने कड़ा देखकर पहचान की। पोस्टमार्टम में पैर से लोहे की रॉड निकलने पर शव रामजानकी का होने की पुष्टि हो गई।
रामजानकी की हत्या के आरोपी विजेंद्र ने बताया कि शुरु में पुलिस ने उसे पकड़कर पूछताछ की तो वह बच गया। पुलिस को उसके खिलाफ कोई सुबूत नही मिला। हालांकि, बीते दो महीने से उसका जीवन नर्क हो गया था। उसे नींद नहीं आती थी। हर वक्त रामजानकी आंखों के सामने नजर आ जाती। वह दिनभर बेचैन रहता था। कई बार सोचा कि पुलिस के पास जाकर सबकुछ बता दे। अपना जुर्म कुबूल कर ले। लेकिन हिम्मत नहीं हुई। मंगलवार दोपहर पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए बुलाया तो उसने खुद ही अपना जुर्म कुबूल कर लिया।