कृष्णानगर इलाके के एक दंपती ने पांच अलग-अलग बैंकों में फर्जी दस्तावेज लगाकर एक करोड़ रुपये कर्ज लिए। बैंक में बंधक बने अपने मकान को भी जालसाजी से दो लोगों को 70 लाख में बेचा और फरार हो गए। चार थानों की पुलिस को जालसाज दंपती की तलाश है।
पुलिस के मुताबिक, कृष्णानगर की एलडीए कॉलोनी निवासी विजय वाजपेयी व उसकी पत्नी बीना वाजपेयी ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की नाका हिंडोला शाखा से 7 अगस्त 2007 को अपनी फर्म वृंदावन फूड इंडस्ट्रीज के नाम पर 20 लाख रुपये कर्ज लिया।
गारंटी के तौर पर उसने 200 वर्ग मीटर के अपने मकान व हजरतगंज के मुरली भवन स्थित फ्लैट के दस्तावेज बैंक में जमा किए। किश्तें जमा न होने पर बैंक ने वसूली की कार्रवाई शुरू की।
कोई नतीजा न निकलने पर बैंक अफसरों ने मौके पर जाकर पड़ताल की। पता चला कि जिस मकान को उसने बैंक में बंधक रखा था उसे पवन अग्रवाल व संगीता को 70 लाख में बेचा जा चुका है।
मकान खरीदने वाले पेश कर रहे दावा
पवन और संगीता मकान पर काबिज थे और विजय व बीना के बारे में जानकारी नहीं दे सके। मुरली भवन के फ्लैट पर भी विजय व बीना का कुछ पता न चलने पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंधक राजनारायण वार्ष्णेय ने नाका कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई।
एसएसआई संजय पांडेय ने मुकदमे की तफ्तीश शुरू की तो दंपती की जालसाजी के और खुलासे हुए। पता चला कि विजय व बीना के खिलाफ हजरतगंज, मानकनगर, सरोजनीनगर व कृष्णानगर में भी मुकदमे दर्ज हैं। विभिन्न बैंकों में मकान व फ्लैट बंधक रखकर करीब 80 लाख रुपये कर्ज लिए थे।
किश्तें जमा न होने पर बैंक प्रबंधकों ने संबंधित थानों में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। चारों थानों की पुलिस को बीना व विजय की तलाश है। पांचों बैंकों के अफसर कर्ज के एवज में बंधक बने मकान कब्जे में लेने के प्रयास में हैं। वहीं मकान खरीदने वाले भी अपना दावा पेश कर रहे हैं।
मामले पर नाका के इंस्पेक्टर विजय प्रकाश सिंह का कहना है कि पौने दो करोड़ की जालसाजी करके फरार विजय वाजपेयी व बीना वाजपेयी पर इनाम घोषित कराने के लिए उनकी जालसाजी की रिपोर्ट तैयार करके उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।