क्रोध और आपसी समझदारी के अभाव में लोग क्या कर गुजरते हैं, इसका उन्हें खुद भी एहसास नहीं होता। पीछे छोड़ जाते हैं अपनों को दुखद यादों के साथ जीने के लिए। पारा के राजनगर मोहल्ले में बुधवार की घटना इसकी बानगी है।
परचून व्यवसायी प्रकाश चंद्र गौतम (42) के सिर पर बुधवार को हैवानियत सवार हुई और उसने पहले पत्नी रामदेवी (40) को गोली मारी और खुद फंदे पर लटककर जान दे दी।
पुलिस ने अलग-अलग कमरे से दोनों की लाश कब्जे में ली और छानबीन शुरू की। पत्नी के सिर पर गंभीर चोटें थीं। पुलिस ने मृतका के पास से खून से सनी एक मुंगरी भी बरामद की है।
बताया जा रहा कि शोर बाहर न जाए इसलिए व्यवसायी ने पत्नी के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया था। पुलिस की मानें तो व्यवसायी के बेटे का इंजीनियरिंग में एडमिशन हो गया था।
उसकी फीस जमा करने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। पत्नी जल्दी मकान बेचने की जिद कर रही थी। जबकि, व्यवसायी अच्छे रेट मिलने का इंतजार कर रहा था। इसे लेकर दोनों का विवाद चल रहा था।
मूलरूप से हरदोई के संडीला निवासी प्रकाश चंद गौतम ग्यारह साल से पत्नी रामदेवी, बेटे अभिषेक, अमर व बेटी नैन्सी के साथ पारा के राजनगर मोहल्ले में अपने मकान में रह रहे थे।
प्रकाश के पिता कालीचरन स्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड पर्यवेक्षक हैं। प्रकाश मोहान रोड काकोरी मोड़ पर परचून की दुकान चलाता था। प्रकाश का भाई रमेश चंद्र गांव में खेती किसानी करता है।
पुलिस के मुताबिक, प्रकाश के बेटे अभिषेक का एडमिशन मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कॉलेज में बीटेक कंप्यूटर साइंस में हो गया है। मगर, प्रकाश के पास उसकी फीस जमा करने को पैसे नहीं है जिस पर पति-पत्नी ने मकान बेचकर फीस जमा करने का फैसला लिया था।
मगर, प्रकाश को अच्छे खरीददार नहीं मिल रहे हैं। रामदेवी जल्द मकान बेचने की जिद कर रही थी, जिसको लेकर दोनों में विवाद हुआ था। बुधवार को गांव से प्रकाश के पिता कालीचरन आए।
उन्हें किसी काम से आलमनगर जाना था। अभिषेक ने सुबह आठ बजे बाबा को आलमनगर छोड़ा। फिर, अभिषेक जीबीटीयू जाने के लिए निकल रहा था।
उसी समय उसकी बहन नैन्सी नाना के घर बाजारखाला के भरतपुरी जाने की जिद करने लगी। अमर को स्कूल भेजकर अभिषेक बहन को लेकर दस बजे नाना के घर के लिए निकला और वहीं से कॉलेज चला गया। दोपहर तीन बजे अभिषेक कॉलेज से लौटते वक्त बहन को लेने नानी के घर गया।
मगर, वह आने को तैयार नहीं हुई, जिससे अभिषेक घर चला आया। घर पहुंचने पर अभिषेक के मकान के मेनगेट पर ताला लटक रहा था। अमर बाहर खड़ा था। अभिषेक ने अमर को मेनगेट फंदाकर अंदर भेजा। अमर ने बरामदे से चाबी उठाकर मेनगेट खोला।
कमरे का दरवाजा खुला था। दोनों कमरे में घुसे तो फर्श पर खून से सनी मां की लाश देखकर उनके होश उड़ गए। मां रामदेवी के सिर से खून बह रहा था। उसके मुंह में कपड़ा ठूंसा था। अभिषेक ने पिता का सेलफोन मिलाया।
दूसरे कमरे में उसकी घंटी बज रही थी। अभिषेक दूसरे कमरे में घुसा तो पिता का शव फंदे से लटक रहा था। पुलिस ने दोनों की लाश कब्जे में ले लिया।
पुलिस की मानें तो शोर बाहर न जाए इसलिए प्रकाश ने पत्नी के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया था। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।