गुडंबा के आधारखेड़ा में बुधवार रात कच्छा-बनियान गिरोह ने ठेकेदार मदन तिवारी के मकान पर धावा बोल 40 लाख रुपये के जेवर-नकदी लूट लिए। रात करीब 12:15 बजे आठ से दस बदमाश गेट फांदकर भीतर घुसे और परिवारीजनों को बंधक बना लिया। जान से मारने की धमकी देते हुए चाबियां हासिल कीं और बक्सों में रखे जेवर व नकदी लेकर भाग गए।
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मदन के छोटे भाई विजय ने मॉडर्न कंट्रोलरूम को सूचना दी, पुलिस के नहीं पहुंचने पर किसी तरह दरवाजा खोलकर परिवारीजन पुलिस के पास पहुंचे और उसे घर लेकर आए। दूसरी ओर दूसरी वारदात को छोटा बताने में जुट गई है। गुडंबा इंस्पेक्टर ऋषिकेश यादव ने मात्र 20,000 रुपये चोरी की बात कही है।
मां को बंधक बना सबको बुलवाया
मदन अपनी पत्नी ममता और तीन वर्षीय बेटी गौरी के साथ मकान के पीछे स्थित कमरे में सो रहे थे। उनका छोटा भाई विजय पत्नी अलका और एक वर्षीय बेटी पूर्वी के साथ बरामदे के सामने वाले कमरे में लेटा था। मदन ने बताया कि इसके बगल वाले कमरे में मां ओमश्री और छह वर्षीय बेटा तुषार सो रहे थे।
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मकान के एक कमरे में मदन का साला कृष्णकांत पत्नी सुनीता और छह महीने के बेटे के साथ किराये पर रहता है। बदमाशों ने ओमश्री के कमरे के दरवाजे पर ईंटें मारकर भीतर की कुंडी तोड़ दी। ओमश्री और उसके पोते को बंधक बनाकर जान से मारने की धमकी देते हुए उसके बेटों-बहुओं के कमरे खुलवा लिए।
दरवाजा खुलवाने के लिए खुद को बताया पुलिस
बदमाशों ने विजय के कमरे की खिड़की पर लगी लोहे की महीन जाली काटकर टॉर्च की रोशनी भीतर फेंकी। विजय के पूछने पर बदमाशों ने खुद को पुलिस बताया और दरवाजा खोलने के लिए कहा। शक होने पर विजय ने अपशब्द कहे तो एक बदमाश बोला-दरवाजा खोलो फिर बताते हैं। इस पर विजय ने मॉडर्न कंट्रोलरूम को फोन किया।
इसके बाद इलाके के ही एक और परिचित का नंबर मिलाया, लेकिन यह कॉल किसी दूसरे को लग गई। तब तक बदमाश ओमश्री के कमरे में घुसकर उन्हें बंधक बना चुके थे।
कच्छा-बनियान पहने थे, साड़ी से सबको बांधा ओमश्री ने बताया कि बदमाश कच्छा-बनियान पहने थे और हाथों में डंडे लिए थे। दो-तीन बदमाश सिर्फ कच्छा पहनकर ही आए थे। बदमाशों ने मारने की धमकी दी तो ओमश्री ने चाबियां उन्हें दे दी। इसके बाद बदमाशों ने साड़ी से दोनों को बांध दिया।
कृष्णकांत, मदन और विजय को भी ओमश्री के कमरे में बांधकर डाल दिया, जबकि उनकी पत्नियों को विजय के कमरे में बंद कर दिया। बदमाशों ने सबके मोबाइल फोन छीनकर उनकी बैटरी निकाल दी। बदमाशों के जाने के बाद ओमश्री ने खिड़की पर लगी लोहे के तारों की जाली नोंच दी और हाथ डालकर बाहर से कुंडी खोला।
बक्से खींचकर बरामदे में लाए
बदमाशों ने बक्से बरामदे में निकाल लिए और ताले तोड़कर भीतर रखे जेवर निकाल लिए। ओमश्री ने बताया कि बक्से में उनके सोने के चार कंगन, 15 सोने के सिक्के, 25 चांदी के सिक्के, सोने का हार, सोने की चेन और कई अंगूठियां रखी थीं। ओमश्री ने इन जेवरों की कीमत 30 से 35 लाख रुपये बताई है। बदमाशों ने विजय के कमरे में भी आलमारी खंगाली और लॉकर तोड़कर भीतर रखे 35,500 रुपये व जेवर निकाल लिए।
नाक की कील मुंह में छिपाकर बचाई बदमाशों ने महिलाओं से जेवर उतरवाने शुरू किए तो सुनीता ने नाक की कील उतारकर अपने मुंह में छिपा ली। ओमश्री ने हाथ में पहनी सोने की एक अंगूठी बचाने में कामयाब रहीं। हालांकि, ममता और अलका के चेन, अंगूठियां और पायल व बिछिया तक बदमाशों ने उतरवा लीं।
चार साल पहले बनवाया था मकान ओमश्री ने बताया कि वह लोग मूलरूप से बाराबंकी के बड्डूपुर गांव के हैं। यहां उन्होंने चार साल पहले मकान बनवाकर बेटो-बहुओं के साथ रह रही हैं। आधारखेड़ा सोसायटी क्षेत्र हैं जहां अभी पूरी तरह से रिहायश नहीं हो सकी है। मकान दूर-दूर पर स्थित हैं। पुलिस की गश्त शायद ही कभी होती हो। सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है।
सूचना के बाद आधारखेड़ा पहुंची पुलिस करीब एक घंटे तक भटकती रही। विजय ने कई बार फोन कर पुलिस को अपने मकान की लोकेशन बताई, लेकिन रास्ते इतने टेढ़े-मेढ़े और खराब थे कि आधी रात को पुलिस वहां पहुंच ही नहीं सकी। बदमाशों के भागने के बाद विजय खुद पुलिस को बुलाकर लाया।
मौके पर नहीं आए इंस्पेक्टर, न अफसरों को बताया डकैती की जानकारी एसएसपी तो क्या ट्रांस गोमती के किसी अफसर को नहीं थी। इससे सीओ गाजीपुर और एएसपी ट्रांस गोमती घटनास्थल नहीं पहुंचे। विजय का कहना था कि इंस्पेक्टर खुद ही मौके पर नहीं आए।
अगर अफसरों को वारदात की गंभीरता की सूचना मिल जाती तो डॉग स्क्वायड की मदद से बदमाशों को पकड़ा जा सकता था। वारदात की जानकारी अफसरों को नहीं होने से न कोई मौके पर आया और न ही फिंगर प्रिंट व अन्य साक्ष्य लिए गए।
यही नहीं इंस्पेक्टर से पूछने पर उन्होंने मात्र 20,000 रुपये की चोरी होने की बात कही।