फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गोंडा एडवायजरी अस्पताल

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
50 पीएचसी में से 42 पर कोई डॉक्टर नहीं

मौजूदा समय में केवल 6 डॉक्टर ही कर रहे इंटर्नशिप
जिले में 172 के सापेक्ष केवल 74 डॉक्टर ही कार्यरत

अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को एक साल तक गांवों में रहकर सेवा करने को कहा है। लेकिन मौजूदा वक्त जिले की स्वास्थ्य सेवाओं का जो हाल है, उसमें तो जो डाक्टर पुराने हो चुके हैं, वह तक गांवों में रुकना पसंद नहीं करते। सीएचसी में तैनाती डॉक्टर आए दिन ड्यूटी से नदारद रहते हैं। हालांकि कुछ सेवाभावी चिकित्सक भी हैं जो हर वक्त मरीजों के उपचार को तत्पर रहते हैं। जिला अस्पताल में जो 6 डॉक्टर इटर्नशिप कर कर रहे हैं, उसमें अधिकांश दो-दो डॉक्टर जिला व महिला अस्पताल में हैं तो दो डाक्टर सीएमओ के अधीन सीएचसी पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
आबादी 34 लाख, अस्पताल 66 और डाक्टर सिर्फ 60। गोंडा जिले में स्वास्थ्य विभाग का सच यही है। जहां की 50 पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) में से 42 ऐसी हैं, जहां कोई डॉक्टर ही नहीं है। ऊपर से जिले के 16 ब्लाकों में संचालित सीएचसी में भी तमाम ऐसी हैं, जहां मानक से दोगुने डॉक्टरों के पद खाली चल रहे हैं। फिर चाहे वह रेफरल यूनिट मनकापुर हो या फिर करनैलगंज। जबकि नियमानुसार एक सीएचसी पर कम से कम 8 डॉक्टर तो तैनात होने ही चाहिए। निदेशालय से जिले में डॉक्टरों के कुल 172 पद सृजित हैं। जिसके सापेक्ष जिले में ब्लाकवार स्थित सीएचसी हलधरमऊ में एक, परसपुर, बभनजोत, नवाबगंज और वजीरगंज में दो-दो, तरबगंज, इटियाथोक, काजीदेवर, मसकनवा में 3-3, पंडरीकृपाल, मुजेहना, मनकापुर में 4-4, बेलसर, कटराबाजार, खरगूपुर में 5-5 तो एक अकेले करनैलगंज सीएचसी में 6 डॉक्टर तैनात हैं। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बालपुर, कंजेमऊ, खरगूपुर, मुंडेरवामाफी, बैजपुर, वीरपुर, पिपरी, सोनौली मोहम्मदपुर में क्रमश: एक-एक एमबीबीएस डॉक्टर तैनात हैं। जिसमें से बैजपुर में तैनात पाए गए डॉक्टर टीपी जायसवाल जिला अस्पताल से सम्बद्ध हैं। जिनकी संख्या कुल मिलाकर 60 होती है। वहीं 12 डॉक्टर स्वास्थ्य सेवाओं की मॉनिटरिंग के लिए तैनात हैं। जिसमें एक सीएमओ भी हैं।
विज्ञापन


इनसेट
छापेमारी में मिले गैरहाजिर पर नहीं हुई कार्रवाई
डॉक्टरों के सीएचसी-पीएचसी से गायब रहने को लेकर पिछले एक साल में सैकड़ों बार छापेमारी हुई। जिसमें दर्जनों की संख्या में डॉक्टर और स्टाफ गायब भी मिले, लेकिन आज तक इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। जिसका नतीजा है कि स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने के बजाए दिनों दिन बिगड़ती जा रही हैं।

इनसेट
प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं कई डॉक्टर
जिले में दर्जनों ऐसे डाक्टर हैं, जो प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। समय-समय पर इनकी खबरें अखबार की सुर्खियां भी बनती हैं। लेकिन इनपर एक्शन नहीं होता। इनकी देखादेखी स्टाफ भी ड्यूटी से नदारत रहता है। ज्यादातर सीएचसी का हाल तो ऐसा है, जहां रात के वक्त कोई डॉक्टर ही नहीं रुकता। हाल के दिनों में अपर निदेशक की छापेमारी में यह बात खुलकर सामने आने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विज्ञापन



इनसेट
दो डॉक्टर गायब तो एक ने दिया त्यागपत्र
जिले में सीएमओ के अधीन सीएचसी बेलसर पर कार्यरत डॉक्टर प्रीती गुप्ता पिछले काफी समय से गायब चल रही हैं। वहीं, करनैलगंज में तैनाती पाए डाक्टर सुएबुल हक भी ड्यूटी से नदारत हैं। इसी तरह बभनान सीएचसी पर तैनाती डॉक्टर अजय श्रीवास्तव त्यागपत्र दे चुके हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें