फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रसोई से रच रहीं सफलता की कहानी : बेटियों के सपनों को दे रहीं उड़ान

Fri, 30 May 2025 02:28 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
विज्ञापन
श्री जगदम्बा स्वयं सहायता समूह में काम करतीं महिलाएं। -संवाद
विज्ञापन
लखनऊ। कोरोना काल की चुनौतियों के बीच जब जीवन की रफ्तार थम गई थी, तब लखनऊ के निशातगंज की चौथी गली में एक नई उम्मीद ने जन्म लिया। यहां की महिलाओं ने श्री जगदम्बा स्वयं सहायता समूह के जरिये न केवल अपने लिए रोजगार का रास्ता तैयार किया, बल्कि अपने बच्चों के सपनों को भी नई उड़ान दी।
विज्ञापन




राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत मणि टंडन ने तीन महिलाओं के साथ इस समूह की शुरुआत की थी। उस समय महज नौ हजार रुपये से शुरू हुआ यह काम आज लाखों के गृह उद्योग में तब्दील हो चुका है। समूह की अध्यक्ष मणि टंडन बताती हैं कि कोरोना के दौरान कई महिलाओं की नौकरियां चली गई थीं। ऐसे में उन्होंने आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाने का निश्चय किया। दादी-नानी के नुस्खों से तैयार किए गए काढ़ा और चाय मसाला जैसे उत्पादों की मांग बढ़ी, जिससे रोजगार की संभावनाएं भी बनीं।

वर्तमान में समूह की 12 महिलाएं प्रतिदिन चार घंटे काम करती हैं। मसाले, खाद्य सामग्री और अन्य घरेलू उत्पाद तैयार करने के साथ ये महिलाएं आत्मसम्मान से भरा जीवन जी रही हैं। अब न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि समाज में उनके प्रति नजरिया भी बदला है।
विज्ञापन


बेटी को ओलंपिक चैंपियन बनाने का सपना

समूह की सदस्य रश्मि केसरवानी अपनी बेटी कारगी को अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी बनाना चाहती हैं। कारगी जिला स्तर की हॉकी खिलाड़ी हैं, लेकिन आर्थिक तंगी उनके रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट थी। पति टैक्सी चालक हैं, जिससे घर चलाना मुश्किल था। ऐसे में रश्मि ने समूह के माध्यम से काम शुरू किया और आज पापड़ बेलकर बेटी के सपनों को संवार रही हैं।



बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए चला रहीं चक्की



अन्य सदस्य अंजुला मिश्रा अपनी बेटी को डॉक्टर बनाना चाहती हैं। वह दो साल से समूह में काम कर रही हैं और आटा पीसने से लेकर चाशनी बनाने तक हर कार्य कुशलता से करती हैं। अंजुला की बेटी नीट की तैयारी कर रही है और मां का मानना है कि उसकी सफलता ही उनके श्रम का असली पुरस्कार होगी।

पढ़ाई के लिए पसीना बहाती मां

समूह की एक और सदस्य नीलम यादव का खुद का पढ़ाई का सपना अधूरा रह गया, लेकिन वह अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहती हैं। उनके पति ऑटो चालक हैं, जिससे आय सीमित है। ऐसे में नीलम ने समूह के काम में जुटकर बच्चों की शिक्षा का जिम्मा अपने कंधों पर उठा लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें