दरार से गुजरती गाड़ियां।
पुल के नदी के ठीक ऊपर जॉइंट खुलने की वजह से आई दरार उसी तरह है जैसी मटियारी फ्लाईओवर में देखी गई थी। एनएचएआई ने दरार दिखने के तुरंत बाद सात दिन के लिए पुल के ऊपर ट्रैफिक बंद कर दिया था।
इन सात दिन में पुल की मरम्मत की गई। इसके बाद ही इसपर ट्रैफिक खोला गया था। ट्रैफिक पुल के ऊपर बंद करने की वजह फ्लाईओवर को नुकसान होने से बचाना था। इसके उलट गोमती पुल पर अब भी ट्रैफिक चल रहा है।
गोमती पुल की दरार को बंद करने की जगह कई दिन पहले ईंट और पत्थर के टुकड़े दरार में डालकर उसे ढंक दिया गया। लापरवाही की गवाह अब यह ईंटें भी बन गई हैं जोकि वाहनों के पहियों से बुरी तरह घिस गई हैं। इससे वाहनों के निकलने के समय गड्ढा भी बड़ा होता चला गया।
गोमती पुल के रिनोवेशन का काम 2009-10 में सेतु निगम ने कराया था। इसके बाद छह दिसंबर 2010 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इसका उद्घाटन अंबेडकर स्मारक के बाकी कामों के साथ किया था। अधिकारियों के मुताबिक इस पुल के रिनोवेशन में करीब 30 करोड़ रुपये का बजट खर्च हुआ था। पुल के ऊपर अंबेडकर पार्क से मिलते-जुलते सजावटी पत्थर और लाइटें भी लगाई गई थीं।