राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज इलाके में शुक्रवार को जयमाल के दौरान दुल्हन अचानक बेहोश होकर स्टेज पर गिरी और उसकी जान चली गई। इससे पहले भी इसी तरह के मामले सामने आ चुके हैं। केजीएमयू के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋषि सेठी ने बताया कि इन लोगों की कार्डियक अरेस्ट की वजह से जान गई। इन्हें बिना देरी किए कॉर्डियक पल्मोनरी रेस्युसिटेशन (सीपीआर) देकर इनकी जान बचाई जा सकती थी।
उन्होंने बताया कि जिस तरह से कम उम्र में ही दिल की बीमारियां हो रही हैं, उससे लग रहा है कि हम एक नई महामारी की ओर बढ़ रहे हैं। देश में इस समय असामान्य मौतों में सबसे बड़ी वजह दिल की बीमारियां होती हैं। इनका आंकड़ा 25 से 30 फीसदी होता है। देश में हर साल 80 लाख से एक करोड़ लोगोें को दिल की बीमारियां होती हैं। इनमें से करीब 1.6 लाख लोगों की मौत हो जाती है। जिन लोगों को अटैक आता है, उनमें से 50 फीसदी ऐसे लोग होते हैं जो अधिकतम पांच साल जीवित रहते हैं। इन 50 फीसदी में भी 20 फीसदी की जान एक साल के भीतर ही चली जाती है। हृदय रोग की गंभीरता को देखते हुए अभी से सजग होने की जरूरत है।
जारिए कार्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक और हार्ट फेल्योर का अंतर
कार्डियक अरेस्ट: कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में व्यक्ति के दिल को चलाने वाला इलेक्ट्रिक सिस्टम काम करना बंद कर देता है या फिर बहुत तेज हो जाता है। इसकी वजह से व्यक्ति बेहोश हो जाता है।
क्या करें: ऐसी स्थिति में व्यक्ति को सबसे पहले सीपीआर देने के बाद इलाज के लिए ले जाना चाहिए। इसमें दवाओं और पेसमेकर आदि के माध्यम से स्थिति नियंत्रण में लाई जाती है।
हार्ट अटैक: हार्ट अटैक के मामले में दिल को खून पहुंचाने वाली धमनियां ब्लॉक हो जाती हैं। इसकी वजह से पर्याप्त मात्रा में खून पंप नहीं हो पाता है और दिल तक ऑक्सीजन न पहुंचने से व्यक्ति की मौत हो सकती है। इसमें सीने में तेज दर्द के साथ ही गले, पीठ और बांह में भी दर्द हो सकता है। इसके साथ ही पसीना, उलझन तथा दिल की तेज धड़कन भी इसका लक्षण होता है।
क्या करें: खून पतला करने वाली दवाएं खाई जा सकती हैं। इसके साथ ही जल्द से जल्द एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचें।
हार्ट फेल्योर: हार्ट फेल्योर के मामले में दिल खून पंप करना ही बंद कर देता है। पुराना हार्ट अटैक भी इसकी वजह हो सकता है। सांस फूलना, पैरों तथा पंजों में सूजन इसका सबसे बड़ा लक्षण होता है। लोगों का रहन-सहन, बढ़ती उम्र, और खानपान इसकी बड़ी वजह हो सकता है।
क्या करें: हार्ट फेल्योर की स्थिति न आए इसलिए पहले से सतर्क रहें। विशेषकर वे लोग जिनको पहले हार्ट अटैक हो चुका है, वे संयमित जीवन व्यतीत करें। नियमित रूप से दिल की जांच कराते रहें।