पेपर लीक प्रकरण के तीन दिन बाद दोबारा कम्बाइंड प्री मेडिकल टेस्ट (सीपीएमटी) कराने का काउंटडाउन शुरू हो गया है। बुधवार को कुलपति प्रो. रविकांत की अध्यक्षता में सीपीएमटी सेल के सभी को-ऑर्डिनेटर की बैठक हुई।
इसमें सभी से परीक्षा में आने वाली दिक्कतों और कमियों के बारे में पूछा गया, जिससे 20 जुलाई को होने वाली परीक्षा कराने में कोई अड़चन न आए।
अधिकतर को-ऑर्डिनेटर्स ने प्रश्नपत्रों को लाने और वापस जमा करने में आई दिक्कतों के बारे में बताया। गाजियाबाद प्रकरण में डीएम और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी चर्चा की गई।
अधिक सुरक्षा बरतने के निर्देश
22 जून को पेपर लीक प्रकरण के बाद केजीएमयू ने सीपीएमटी परीक्षा कराने के लिए कमर कस ली है। कुलपति प्रो. रविकांत की अध्यक्षता में बुधवार को चली मैराथन बैठक में 22 जून को हुई परीक्षा के दौरान आने वाली परेशानियों पर चर्चा की गई।
साथ ही 20 जुलाई को होने वाली परीक्षा की तैयारियों के बारे में कुलपति को जानकारी दी गई। सीपीएमटी को-ऑर्डिनेशन सेल के सभी शिक्षकों से 22 जून के एक्सपीरियंस के बारे में पूछा गया।
बताया जा रहा है कि शिक्षकों ने मुख्य समस्या प्रश्न पत्रों को सेंटर तक पहुंचाने की बताई है। जिलों में बनाए गए नोडल ऑफिसर्स को भी पेपर बॉक्स की सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्कता बरतने के लिए निर्देश देने के लिए कहा गया, जिससे फिर से कोई अप्रत्याशित घटना से बचा जा सके।
बैठक में इन मुद्दों पर हुई चर्चा
कुलपति ने बैठक में सभी को-ऑर्डिनेटर्स को फिर से सीपीएमटी परीक्षा को सम्पन्न कराने के लिए जुटने के लिए कहा। खासतौर से केंद्र निर्धारण, शिक्षकों की ड्यूटी, प्रवेश पत्रों को समय पर उपलब्धता पर ध्यान रखने के लिए बैठक में चर्चा की गई।
सिर पर लादकर ले जाना पड़ा पेपर का बक्सा
सीपीएमटी परीक्षा कराने में को-ऑर्डिनेटर्स को भी पापड़ बेलने पड़े। किसी को रिक्शे से सेंटर तक पेपर बॉक्स ले जाना पड़ा तो किसी को ट्रेन से खुद ही बक्से को ढोना पड़ा।
बताया जा रहा है कि इस बारे में भी बुधवार को हुई बैठक में चर्चा की गई। अधिकारियों का कहना था कि बक्से की सुरक्षा के चलते इस तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है। इसलिए इस बार की परीक्षा में इसका खास ध्यान रखा जाएगा।