लखनऊ। गोपाष्टमी पर हवन-आरती के साथ गो माता का पूजन किया गया और उन्हें हरा चारा व गुड़ खिलाकर उनकी सेवा की गई। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में गोशालाओं में आयोजन हुए। चौक की अवध गोशाला में आयोजित समारोह में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि हमारी संस्कृति में गायों के पूजन की परंपरा रही है। गायें पावनता की पोषक होती हैं और उनकी सेवा से समृद्धि आती है।
ब्रजेश पाठक के अलावा एमएलसी मुकेश शर्मा, भाजपा मीडिया प्रभारी प्रवीण गर्ग और आयोजक पार्षद अनुराग मिश्रा ने गायों को चुनरी ओढ़ाई और फूल माला पहनाकर विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर आचार्य राजेश शुक्ला और पंडित नीरज अवस्थी ने विधि-विधान से पूजा कराई। प्रसाद का वितरण किया गया। बुधवार सुबह गो साज-सज्जा प्रतियोगिता में पशुपालकों की 68 गायों ने भाग लिया। गोपालकों में अजय शंकर, आकाश भारती, दीपक चौधरी, गुड्डू यादव, ऋषि शुक्ला, ब्रजेश कश्यप का उपमुख्यमंत्री ने अंग वस्त्र पहनाकर सम्मान किया।
सनातन संस्कृति में गाय को माता का स्थान : जयवीर
लखनऊ। जानकीपुरम सेक्टर-एफ में स्थित लक्ष्मण गोशाला में गोपाष्टमी पर हुए समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सनातन संस्कृति में गाय को माता का स्थान प्राप्त है। गोपाष्टमी का पर्व गाय और गोवंश की महिमा को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान कृष्ण ने पहली बार गोपालक के रूप में गोसेवा आरंभ की थी।
उन्होंने कहा कि गोपाष्टमी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय ग्राम्य संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। गाय भारतीय कृषि, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण से गहराई से जुड़ी हुई है। गाय से प्राप्त दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र को पंचगव्य के रूप में जीवनोपयोगी माना गया है। इस अवसर पर विधायक डॉ. नीरज बोरा ने कहा कि गोपाष्टमी हमें यह संदेश देती है कि गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि जीवनदायिनी शक्ति है। इसका संरक्षण हर व्यक्ति का धर्म है। कार्यक्रम में डॉ. श्याम नंदन, प्रभु जालान, भारत लोक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष भीम अग्रवाल, आशीष अग्रवाल, बिंदु बोरा, डॉ. विवेक तोमर, सौरभ वाल्मीकि, सौरभ तिवारी, पार्षद अनुराग मिश्रा, रश्मि सिंह, राघवराम और मान सिंह यादव आदि उपस्थित रहे।
गोपाष्टमी पर हवन-आरती के साथ गो माता का पूजन किया गया और उन्हें हरा चारा व गुड़ खिलाकर उनकी से