श्रावस्ती के अकबरपुर में स्थित गोशाला में सोमवार को भूख व निमोनिया से कई गोवंशों की मौत हो गई। इनमें से प्रशासन ने आठ गोवंश के शव का पोस्टमार्टम कराया है। हालांकि क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि मरने वाले गोवंशों की संख्या अधिक है। कई गोवंश के शव गोशाला के बगल नहर में उतराते देखे गए। घटना की जानकारी के बाद डीएम व स्थानीय विधायक ने मौके पर पहुंचकर जायजा लिया।
इकौना के अकबरपुर में गोशाला का संचालन हो रहा है। दो दिन पूर्व इस गोशाला से कुछ दूर स्थित गोपालपुर गोशाला में पानी भर गया था। जिसके चलते वहां से भी कुछ गोवंश इस गोशाला में शिफ्ट किए गए थे। जिसके चलते यहां क्षमता से कई गुना अधिक गोवंश एकत्र हो गए।
सोमवार को सुबह अचानक गोवंशों की मौत होने लगी। धीरे-धीरे कई गोवंश की मौत हो गई। इसकी सूचना ग्रामीणों द्वारा अन्य लोगों को दी गई। आनन-फानन में चिकित्सकों का दल गोशाला पहुंचा तो वहां आठ गाय पड़ी थीं। बाकी गोवंश गायब थे। मौके पर पहुंचे चिकित्सकों ने आठ गोवंश के शव का पोस्टमार्टम किया।
गोवंश की मौत का कारण लगातार भीगने व निमोनिया बताया गया। घटना की जानकारी के बाद स्थानीय विधायक रामफेरन पांडेय व डीएम ओपी आर्य मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों का दावा है कि कई गोवंश तो सोमवार सुबह से दोपहर तक ही मर गए थे। रविवार रात भी गोवंश की मौत हुई थी। जिन्हें बगल में बह रही नहर में फेंक दिया था। ग्रामीणों ने ऐसे ही कुछ गोवंश के शव उतराते देखे।
इसके साथ ही ग्रामीणों का दावा है कि लगभग एक माह से गोशाला में चारे की व्यवस्था नहीं है। स्थानीय लोग कभी-कभी पुआल आदि फेंक जाते हैं, जिसे खाकर गोवंश जीवित थे। लेकिन एक सप्ताह से बरसात व बाढ़ के कारण उनको वह भी नहीं मिल पा रहा था। ऊपर से पानी में सारे जानवर भीग रहे थे, जिसके कारण लगातार मौत हुई हैं।
वहीं, मौके पर पहुंचे श्रावस्ती विधायक रामफेरन पांडेय व एसडीएम इकौना राजेश मिश्रा ने गोशाला में बंद गोवशों की हालत देख कर अपने पास से 21 हजार की मदद की। ताकि इन गोवंशों को चारे की व्यवस्था की जा सके। वहीं, इस संबंध में एसडीएम का कहना है कि गोशाला में मृत गोवंश के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। मौके पर 14 गोवंश बीमार पड़े थे, जिनका इलाज चिकित्सक कर रहे हैं।
गोशाला में आठ गोवंश की मौत हुई है, जिनका पोस्टमार्टम कराया गया है। कुछ गोवंश बीमार हैं, जिनका इलाज किया जा रहा है। नहर में जो गोवंश के शव देखे गए हैं। संभवता वह कहीं से बह कर आए हों। वह गोशाला के नहीं हैं। गोशाला के मवेशियों के कान में टैग लगा हुआ है।
- अवनीश राय, सीडीओ