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200 साल पुरानी रिवायत पर लगा ब्रेक, इस बार ईद पर नहीं दिखेगी टर्र मेले की रौनक

Mon, 25 May 2020 04:37 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना के चलते ईद और उसके अगले दिन होने वाले टर्र मेले की रौनक इस बार नहीं दिखेगी। नगर के इतिहासकार डॉ. योगेश प्रवीन बताते हैं कि ईद के बाद शहर में टर्र मेले की रिवायत 200 साल पुरानी है। पुराने शहर से लेकर, चिड़ियाघर और नए इलाकों तक रहने वाली मेले की चहल-पहल इस बार नहीं होगी।

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नगर के इतिहासकार डॉ. योगेश प्रवीन बताते हैं कि पहले यह मेला मौलवी गंज, अमीनाबाद के आसपास के इलाकों में लगा करता था। चूंकि ईद की नमाज में महिलाएं बाहर नहीं जा पाती थी। ईद की नमाज के अगले दिन टर्र मेले में सैर सपाटे या खरीदारी के लिए बच्चों के साथ निकलती थीं।

समय गुजरने और आबादी बढ़ने के साथ मेला लगने का स्थान भी बदलने लगा। कुछ वर्षों से मेला रूमी दरवाजा, घंटाघर, नींबू पार्क के आसपास ईद के अगले दिन जमने लगता था। पर लॉकडाउन के चलते इस बार मेले में सन्नाटा ही रहेगा। यहां दिखती थी रौनक टर्र के मेले की रौनक पुराने शहर से लेकर ट्रांसगोमती तक बखूबी दिखती थी।
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घंटाघर, हुसैनाबाद गेट, रूमी दरवाजा, नींबू पार्क, छोटा-बड़ा इमामबाड़ा, बुद्धा पार्क, हाथी पार्क के पास सुबह से शाम तक खाने-पीने की दुकानों के अलावा खेल खिलौनों की दुकानें फुटपाथ पर खूब सजती थीं। कुछ सालों में टर्र मेले के दिन चिड़ियाघर में सुबह से शाम तक 20-22 हजार लोग सैर कर लिया करते थे।

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