लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने लखनऊ विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसरों डॉ. हिमांशु मोहन और डॉ. संगीता साहू की नियुक्तियां रद्द करने के कुलाधिपति के आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विषय में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए तय विशेष अर्हताओं को ही प्रभावी माना जाएगा। सामान्य पात्रता की शर्तों के आधार पर विशेष प्रावधानों को निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने दोनों शिक्षकों के चयन को वैध करार देकर उन्हें नियुक्ति से जुड़े सभी परिणामी लाभ देने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने यह फैसला डॉ. हिमांशु मोहन और डॉ. संगीता साहू की याचिकाओं पर दिया। दोनों की नियुक्ति लखनऊ विश्वविद्यालय के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर हुई थी। हालांकि, नियुक्तियों के खिलाफ शिकायत के बाद कुलाधिपति ने 27 नवंबर 2017 को यूपी राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 68 के तहत इन्हें निरस्त कर दिया था।