होटल अग्निकांड में क्लीनचिट पर सवाल, कोर्ट ने कहा- करें विवेचना
19 जून 2018 को हादसे में गई थी सात लोगों की जान
लखनऊ। नाका के होटल अग्निकांड में सात लोगों की मौत के मामले में जिम्मेदारों को क्लीनचिट व लचर विवेचना के आरोपों को लेकर अग्रिम विवेचना की मांग वाली अर्जी सीजेएम आनन्द प्रकाश सिंह ने स्वीकार कर ली। कोर्ट ने शनिवार को विवेचक को इस बाबत आदेश दिया।
अग्निकांड में जान गंवाने वाले प्रियांक शर्मा की पत्नी सुरक्षा शर्मा की ओर से वकील ज्योतिरेश पाण्डेय ने 24 जून को अग्रिम विवेचना की मांग वाली अर्जी दी थी। बताया था कि 19 जून 2018 को नाका स्थित एसएसजे इंटरनेशनल होटल में लगी आग में प्रियांक की मौत हो गई थी। मामले में शुरुआत से पुलिस का लचर रवैया रहा। दरोगा ने अपनी तरफ से रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सुरक्षा शर्मा व उनके भाई सौरभ कई बार विवेचक परशुराम सिंह से मिले, पर उन्होंने कोई बयान दर्ज नहीं किया। इतना ही नहीं मनमाने ढंग से एसएसजे के निदेशक सुरेन्द्र जायसवाल और विराट होटल के निदेशक अर्पित जायसवाल समेत चार के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर अन्य जिम्मेदार अधिकारियों, होटल के अन्य निदेशकों सरिता जायसवाल, आशीष जायसवाल को क्लीन चिट दे दी।
कोर्ट में ज्योतिरेश पाण्डेय ने तर्क दिया कि दोनों होटल बिना अनापत्ति प्रमाणपत्र के आवासीय नक्शे पर अवैध तरीके से चलाए जा रहे थे। एडीजी राजीव कृष्णा की रिपोर्ट का हवाला दिया गया कि उन्होंने इसमें एक आईएएस, पीसीएसी समेत 30 इंजीनियरों व कर्मचारियों को घटना का दोषी माना है। हालांकि, पुलिस ने लचर विवेचना की और जिम्मेदारों को क्लीन चिट दे दी। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी ने अग्रिम विवेचना कराने पर कोई आपत्ति नहीं की, जिस पर कोर्ट ने इसका आदेश दे दिया।