पैर के अंगूठे में लगी चोट का गलत इलाज कर दिव्यांग बना देने का आरोप लगाते हुए पीड़ित दारा सिंह ने दो चिकित्सकों पर एफआईअर की मांग सीजेएम कोर्ट में अर्जी देकर की है।
सीजेएम हृषिकेश पांडेय ने जानकीपुरम थाने से रिपोर्ट तलब करते सुनवाई के लिए 13 मार्च की तारीख तय की है।
पीड़ित ने अर्जी में बताया कि अक्तूबर 2020 में अंगूठे में चोट लगी थी। इलाज कराने बीकेटी स्थित राम सागर मिश्र राजकीय चिकित्सालय गया था, जहां डॉ. एसपी वर्मा पर्याप्त सुविधा न होने की बात कह कर जानकीपुरम स्थित न्यू इंडिया नर्सिंग होम लेकर गए।
बाद में उन्होंने नर्सिंग होम के डॉक्टर के साथ मिलकर अंगूठे की चोट के इलाज की जगह पूरे पैर पर प्लास्टर चढ़ा दिया।
आरोप है कि दोनों डॉक्टरों ने बिना कारण सात बार प्लास्टर चढ़ाया और हजारों रुपये इलाज के नाम पर वसूले। बार-बार प्लास्टर चढ़ाने से पैर में फफोले पड़ने के साथ इन्फेक्शन फैल जाने से अब वह विकलांग होने का दंश झेल रहा है।
अमित कंछल के खिलाफ हजरतगंज थाने से रिपोर्ट तलब
सीजेएम हृषिकेश पांडेय ने व्यापारी नेता बनवारी लाल कंछल के बेटे अमित कंछल के खिलाफ केस दर्ज किए जाने की अर्जी पर हजरतगंज थाने से रिपोर्ट तलब की है। मामले की सुनवाई 13 मार्च को होगी। कोर्ट में अर्जी के जरिय सीतापुर निवासी निधि गुप्ता ने बताया कि आरोपी अमित कंछल ने देवा रोड स्थित ऑरेंज कंट्री में मकान खरीदने के लिए 9.40 लाख रुपये लेकर जनवरी 2013 में आवंटन पत्र भी दे दिया। निर्धारित समयावधि के बाद भी मकान न मिलने पर जब जमा राशि वापस मांगी तो बंद खाते का चेक थमा दिया। आरोपी ने बहुत से लोगों के साथ धोखाधड़ी की है और कार्यालय बंद करके भाग गया है।
नियुक्ति में गड़बड़ी पर सुनवाई छह को
लखनऊ। आपराधिक मुकदमे दर्ज होने के बाद भी आरोपी को सहायक लेखाकार के पद पर नियुक्ति देने के मामले में आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग वाली अर्जी पर सीजेएम कोर्ट ने हजरतगंज थाने से रिपोर्ट तलब की है। मामले में नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह, जलकल विभाग के महाप्रबंधक राम कैलाश गुप्ता और बहराइच के पशु चिकित्साधिकारी अनुराग यादव समेत आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। सीजेएम हृषिकेश पांडेय ने मामले की सुनवाई छह मार्च को तय की है। वादी विवेकानंद दुबे ने कोर्ट में दी अर्जी में बताया कि मृत्युंजय को विभाग में मृतक आश्रित कोटें से सहायक लेखाकार के पद पर नियुक्त किया गया था, जबकि उसके खिलाफ चिनहट थाने में मुकदमा भी दर्ज था। आरोप है कि नगर आयुक्त और महाप्रबंधक जलसंस्थान को इसकी जानकारी देकर मृत्युंजय के चरित्र सत्यापन के लिए भी कहा गया, लेकिन इसकी पूरी तरह अनदेखी कर दी गई।