अयोध्या। जानलेवा हमला के एक मामले में दोषी पाते हुए कोर्ट ने युवक को 7 साल के कठोर कारावास व 6000 जुर्माने से दंडित किया है। फैसला विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट हरिनाथ पांडेय की अदालत से हुआ ।घटना के पीछे नीलामी में मिले मछली के तालाब के हिस्सेदारी का विवाद था।
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी पारसनाथ अभियोजन अधिकारी अशोक कुमार मिश्रा ने बताया कि घटना 1 जून 2014 की है। पूरा कलंदर थाना क्षेत्र के अकवारा गांव में 26 दिसंबर 2013 को मछली पालने के तालाब की नीलामी हुई थी। इसमें बोली लगाने के लिए गांव के कई लोग मौजूद थे।
गांव के भरत लाल ने 2 तालाबों के नीलामी की बोली लगाई और नीलामी उसके पक्ष में कर दी गई ।एक तालाब कि धनराशि तो उसने स्वयं जमा करके रसीद ले ली दूसरे तालाब की धन राशि के लिए उसके पास पैसे नहीं थे इसके लिए उसने गांव के जगदीश से ढाई हजार तथा श्री राम से 2900 लेकर नीलामी की धनराशि जमा कराई।
नीलामी की धनराशि जमा करते समय उसने जगदीश व श्री राम को आश्वासन दिया था कि वह उन्हें तालाब में हिस्सेदारी देगा। जब उन लोगों ने तालाब मैं हिस्सा देने के लिए कहा तो 1 जून 2014 की रात 8:00 बजे भरत लाल उसकी पत्नी शांति व प्रेम कुमार ने मिलकर निर्मला, उसकी लड़की रेनू को लाठी डंडा से मारा पीटा तथा भरत लाल ने निर्मला के पति भगवती प्रसाद को बल्लम से मारा था।
इसकी रिपोर्ट सबके खिलाफ जानलेवा हमला व दलित उत्पीड़न अधिनियम के तहत लिखाई गई थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने प्रेम कुमार व शांति देवी को दोष मुक्त कर दिया जबकि भरत लाल को जानलेवा हमला व दलित उत्पीड़न अधिनियम के तहत दोषी पाते हुए सजा दी।