हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने भाजपा, बसपा व सपा आदि राजनीतिक दलों द्वारा आसपास के सरकारी बंगलों को पार्टी दफ्तरों में मिलाने के मामले में प्रदेश सरकार को 26 सितंबर तक अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। कोर्ट ने एक याचिका के संदर्भ में सरकारी वकील को राज्य सरकार से निर्देश हासिल करने के लिए समय दिया है।
बृहस्पतिवार को जस्टिस विक्रम नाथ व जस्टिस राजेश सिंह चौहान की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता मोती लाल यादव की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका में भाजपा, बसपा व सपा आदि राजनीतिक दलों द्वारा अपने शासनकाल में आसपास के सरकारी बंगलों को पार्टियों के कार्यालयों में मिलाने का मुद्दा उठाया गया है।
याचिका में राजधानी के पॉश इलाकों में स्थित सरकारी बंगलों को पार्टी कार्यालयों में मिलाने का सरकारी आदेश रद्द करने और इस प्रकरण की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने का आग्रह किया गया है। साथ ही, इन बंगलों को खाली कराकर उनके मूल स्वरूप में लाने व राजनीतिक दलों से इसका मुआवजा वसूलने का अनुरोध भी किया गया है।
याची ने राज्य संपत्ति विभाग के प्रमुख सचिव व राज्य संपत्ति अधिकारी के साथ ही पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्षों को भी पक्षकार बनाया है। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता रमेश कुमार सिंह ने याचिका में उठाए गए मुद्दों के संबंध में सरकार से निर्देश हासिल करने के लिए कोर्ट से समय देने का आग्रह किया। इसे अदालत ने मंजूर करते हुए अगली सुनवाई 26 सितंबर को तय कर दी है।