पीलीभीत फर्जी मुठभेड़ में 10 सिख युवकों को मौत के घाट उतारने के दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों और उनके परिवारीजनों की कोर्ट रूम में नारेबाजी और तोड़फोड़ को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने अदालत की अवमानना माना है।
इस दौरान मूकदर्शक बने रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के काम को भी अदालत की अवमानना माना गया है। अदालत का कहना है कि सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने अपराधियों को काबू में करने के बजाय उन्हें उकसाया। फर्जी मुठभेड़ मामले में 47 पुलिसकर्मियों को सोमवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
विशेष न्यायाधीश लल्लू सिंह ने अपने आदेश में कहा कि सोमवार को दोषियों को सजा सुनाने के बाद वह अपने विश्राम कक्ष में चले गये। आदेश पर सभी दोषियों के दस्तखत होने थे। यह काम कोर्ट मोहर्रिर राधेश्याम पांडेय और सीबीआई के पैरोकार पंकज कुमार को सौंपा गया।
जैसे ही दोषियों को निर्णय पर दस्तखत करने के लिए कहा गया तो सभी ने कोर्ट के मूल निर्णय को फाड़ने की कोशिश की। निर्णय की प्रति मांगने लगे तो कोर्ट ने सभी को बताया कि जैसे ही निर्णय पर सभी सजायाफ्ता दस्तखत कर देंगे वैसे ही निर्णय की प्रति दे दी जाएगी।
दोषियों को सिगरेट व पान मसाला उपलब्ध कराते रहे पुलिस वाले
विशेष जज ने अपने आदेश में कहा कि इसी दौरान क्षेत्राधिकारी राधेश्याम राय, प्रभारी निरीक्षक कैसरबाग महंथ यादव, क्षेत्राधिकारी अभय नाथ त्रिपाठी, निरीक्षक जसकरन सिंह, अशोक कुमार मिश्रा, दरोगा सुधाकर पांडेय, राम नरायन यादव, रमेश चंद्र, राजेश सिंह तथा चन्द्रमोहन वहां मौजूद थे। इन लोगों ने अराजकता फैलाने वालों को नियंत्रित करने की बजाये उन्हें उकसाया।
इतना ही नहीं ये पुलिस वाले दोषियों को सिगरेट व पान मसाला उपलब्ध कराते रहे और दोषी कोर्ट रूम में सिगरेट पीते रहे। कोर्ट ने एसएसपी की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
आरोपियों ने कोर्ट रूम की कुर्सियों पर कब्जा कर लिया। सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक एससी जायसवाल को धक्का देकर उनकी कुर्सी छीन ली। इतना ही नहीं सीबीआई के अधिकारियों को गोली मारने की धमकी दी।
न्यायपालिका व सीबीआई मुर्दाबाद के नारे लगाए
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि, दोषियों ने न्यायपालिका व सीबीआई मुर्दाबाद के नारे लगाए। खिड़की व लाकअप तोड़ने लगे।
कोर्ट के पेशकार ने रोकने की कोशिश की तो पेशकार अनिल कुमार श्रीवास्तव पर हमला बोल दिया। लोक अभियोजक एवं पेशकार ने किसी तरह भागकर विशेष जज के चैंबर में शरण ली।
एसएसपी के काम पर भी एतराज
कोर्ट ने अपने आदेश में राजधानी के एसएसपी राजेश कुमार पांडेय पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि शाम 6:15 तक कोई अतिरिक्त पुलिस बल न आने पर उन्होंने स्वयं कई बार एसएसपी को फोन किया परन्तु एसएसपी की जगह कोई अन्य व्यक्ति फोन उठाता था तथा बार-बार पुलिस बल भेजने का आश्वासन देता रहा इस पर विशेष जज ने जिला जज को सूचना दी।
मुहर्रिर भी कर रहा था दोषियों की मदद
कोर्ट परिसर की स्थिति लगातार बिगड़ने पर विशेष जज ने जिला जज को फोन करके बताया कि उनका कोर्ट मुहर्रिर राधेमोहन पांडेय दोषसिद्ध अपराधियों की सजा का वारंट नहीं ले रहा है और व्यवस्था खराब होती जा रही है।
इस पर कोर्ट में तैनात पीएसी के जवानों ने विशेष जज के चेंबर के सामने सुरक्षा व्यवस्था संभाल ली। कोर्ट ने कहा इसके बाद मेरे द्वारा डांटने व उच्च न्यायालय को प्रकरण की लिखित जानकारी देने की धमकी के बाद कोर्ट मुहर्रिर ने कस्टडी वारंट लिया।
इस बीच स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ के कुछ वरिष्ठ एडीजे व सीजेएम विशेष जज के चेंबर में गए तथा क्षेत्राधिकारी राधेश्याम राय को व्यवस्था नियंत्रित करने व सभी सजायाफ्ता को जेल भेजने के निर्देश दिए।