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Lucknow News: कैंसर से जंग में हौसले ने दिलाई जीत

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कैंसर सर्वाइवर नेहा सिंह।
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लखनऊ। हौसला और उम्मीद हो तो मुश्किल से मुश्किल दौर का सामना किया जा सकता है। स्तन कैंसर को मात देने वाली नेहा सिंह और निहारिका की कहानी भी यही संदेश देती है। दोनों का कहना है कि कैंसर का इलाज लंबा और चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन सही समय पर इलाज, परिवार का साथ और खुद पर भरोसा इस लड़ाई को आसान बना सकता है।
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जीने का नाम है जिंदगी
स्तन कैंसर सर्वाइवर नेहा सिंह ने बताया कि 2022 में बेटी को जन्म देने के बाद उन्हें ऑटोइम्यून बीमारी हो गई। इसी दौरान उन्हें थकान, त्वचा में बदलाव और स्तन में गांठ महसूस हुई। एफएनएसी जांच की रिपोर्ट निगेटिव आने पर वह कुछ समय के लिए मुंबई चली गईं। लौटने पर उन्होंने गांठ निकलवाने का फैसला किया। डॉक्टर की सलाह पर बायोप्सी कराई तो स्तन कैंसर का पता चला।
नेहा ने बताया कि वह परेशान जरूर थीं, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। कीमोथेरेपी का पहला अनुभव बेहद दर्दनाक था। बाल झड़ गए थे। ऐसे समय में डांस ने मानसिक सुकून दिया। नेहा का कहना है कि कैंसर का इलाज लंबा और खर्चीला होता है। ऐसे में मरीजों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।
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परिवार के साथ से जीती जंग
निहारिका को 2019 में शादी के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान स्तन कैंसर का पता चला। परिवार में पहले इस बीमारी से दो लोगों की मौत होने के कारण वह जांच से डरती थीं। बाद में उन्होंने पीजीआई में इलाज कराया। कीमोथेरेपी के दौरान पति और परिवार ने उनका पूरा साथ दिया और हिम्मत बढ़ाई।
अब स्वस्थ होने के बाद निहारिका बच्चों को पढ़ाती हैं और जिंदगी को नए उत्साह के साथ जी रही हैं। वह महिलाओं को मासिक धर्म के 15 दिन के बाद स्तनों की स्वयं जांच करने और किसी भी गांठ, दर्द या सूजन की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह देती हैं। उनका कहना है कि समय पर जांच और इलाज से कैंसर के खिलाफ लड़ाई में मदद मिलती है।

कैंसर सर्वाइवर नेहा सिंह।

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