शादी का शुरुआती समय जो आपसी समझ और प्यार बढ़ाने का दौर होता है, उसी दौर में अब जोड़े अलग हो रहे हैं। ऐसे मामले तेजी से बढ़े हैं। खासकर आर्थिक संपन्न लोगों में। पारिवारिक दबाव में शादी करना इसकी बड़ी वजह है।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान बताती हैं कि रोज पति-पत्नी विवाद के 30-35 मामले आते हैं। इनमें छह महीने से एक साल के भीतर आठ से नौ मामले हनीमून पीरियड वाले सामने आए हैं, यानी 20-25 प्रतिशत मामले इसी के थे। इनमें करीब 75 प्रतिशत तक में मनपसंद व्यक्ति की जगह जबरदस्ती किसी और से शादी होने की बात सामने आई। हर महीने 70 प्रतिशत से अधिक मामले पति-पत्नी के विवाद के होते हैं।
केस-1
एक हाई प्रोफाइल कॉर्पोरेट कपल की शादी के महज दो महीने बाद ही मामला आयोग पहुंच गया। इनका हनीमून के दौरान ही विवाद हो गया। बात इतनी बढ़ी कि घर लौटते ही दोनों ने अलग होने की अर्जी दे दी। मामला आयोग पहुंचा तो पता चला युवती किसी और से शादी करना चाहती थी, लेकिन घर वालों ने उसकी जबरदस्ती शादी कर दी थी।
केस-2
शादी के एक साल के भीतर ही आयोग पहुंचे सरकारी शिक्षक जोड़े में व्हाट्सएप स्टेटस को लेकर विवाद देखने को मिला। पति का आरोप था कि पत्नी शादी तय होने के बाद दुखभरे स्टेटस डालती थी, उसका किसी और से संबंध था। जबरदस्ती शादी की गई थी। ऐसे में आए दिन झगड़े होते थे।
जोर-जबरदस्ती नहीं, मन का मामला है शादी
अध्यक्ष बबीता सिंह कहती हैं कि शादी जबरदस्ती नहीं, बल्कि मन का मामला है। परिवार को जबरदस्ती करने से बचना चाहिए। अधिकतर मामलों में लड़की या लड़के का किसी और से संबंध होता है। इसके बाद भी परिजन जबरदस्ती किसी और से शादी कर देते हैं। ऐसे में कुछ महीने बाद ही टूट जाते हैं। इन दिनों ऐसी कई घटनाएं भी देखने को मिल रही हैं, जिनमें मनपसंद शादी नहीं होने पर पति या पत्नी के हत्या तक कर दी गई।