उत्तर प्रदेश के आयुष कॉलेजों में दाखिले के लिए पीजी की काउंसिलिंग पांच जनवरी से होगी। यूजी के लिए काउंसिलिंग जनवरी के दूसरे सप्ताह में शुरू हो सकती है।
नीट के परिणाम घोषित होने के बाद एमबीबीएस- बीडीएस के लिए मॉप अप राउंड शुरू हो गया है। लेकिन आयुष कॉलेजों की काउंसिलिंग बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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पिछले सत्र में दाखिले में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। मामले में एसटीएफ जांच कर रही है। इसी काउंसिलिंग में देरी हुई है।
आयुष काउंसलिंग को लेकर निजी कॉलेजों से मांगी गई रिपोर्ट
प्रदेश में आयुष कॉलेजों में दाखिले की तैयारी अंतिम दौर में है, लेकिन अभी तक निजी कॉलेजों की सीटों की तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। ऐसे में काउंसिलिंग शुरू होने से पहले आयुष विभाग ने निजी कॉलेज संचालकों से मान्यता से संबंधित रिपोर्ट मांगी है ताकि दाखिले के बाद किसी तरह का विवाद न हो।
प्रदेश में पिछले साल निजी क्षेत्र के 58 कॉलेजों में 5010 सीट पर बीएएमएस, यूनानी के 18 कॉलेजों में 670 सीटों पर बीयूएमएस और होम्योपैथिक की चार कॉलेजों में 200 सीटों पर बीएचएमस में दाखिला दिया गया था। इस सभी सीटों पर नए सत्र में दाखिला शुरू होने से पहले केंद्रीय आयुष मंत्रालय से संबद्ध बोर्ड से जांच होती है।
जांच में अध्यापकों की संख्या, संसाधन आदि के आधार पर सीट तय की जाती है। पिछले साल के दाखिले में हुए विवाद के बाद इस साल फूंक-फूंक कर कदम रखा जा रहा है। प्रदेश के कुछ निजी कॉलेजों का निरीक्षण पूरा हो गया है तो कुछ में चल रहा है। इसी तरह कई कॉलेजों में निरीक्षण के दौरान खामियां पाई गई थीं, जिन्हें दुरुस्त करने के लिए वक्त दिया गया है। ऐसे में आयुष विभाग पीजी और यूजी की काउंसिलिंग शुरू करने के पहले पूरी तरह से आश्वस्त होना चाहता है। ऐसे में कॉलेजों से मान्यता के संबंध में हरी झंडी मिली है तो उसका विवरण दिया जाए। कॉलेजों से मिली रिपोर्ट और मान्यता देने वाले बोर्ड से सत्यापन कराया जाएगा। फिर उसी हिसाब से संबंधित कॉलेज में छात्रों को सीटें अलॉट की जाएंगी।