रायबरेली। सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों की ऐसी हालत नहीं है, बल्कि नगर क्षेत्र के विद्यालयों का हाल भी कुछ ऐसा ही है। कंपोजिट विद्यालय चक अहमदपुर के सामने बारिश का पानी भरा हुआ है। इसी रास्ते से होकर बगल के स्कूलों के बच्चे भी जाते हैं, लेकिन जलभराव के कारण बच्चों को दुश्वारी झेलनी होगी। ग्रीष्मावकाश के कारण 20 मई से बंद चल रहे परिषदीय विद्यालयों के ताले 3 जुलाई से खुलेंगे, लेकिन आला अफसरों के कहने के बावजूद व्यवस्था नहीं कराई गई। बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने विद्यालयों में 3 जुलाई से पठन-पाठन शुरू होने से पहले बच्चों के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के लिए विद्यालय परिसर की साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल, बैठने की व्यवस्था करने को कहा था। प्रभावी कार्रवाई के लिए सभी डीएम को आदेश दिए गए थे, लेकिन जिले में आदेश की धज्जियां उड़ाई गई। बीएसए से लेकर खंड शिक्षा अधिकारी तक स्कूलों की विजिट करने की जरूरत नहीं समझी। कहीं साफ-सफाई नहीं कराई गई और न ही उगी झाडिय़ों को कटवाया गया। जलभराव की समस्या भी दूर नहीं की गई, जिससे ज्यादातर स्कूलों या जाने वाले रास्तों पर बारिश का पानी भरा हुआ है। इससे विषैले जीव-जंतुओं का खतरा बना हुआ है। ऐसे में विद्यार्थी कैसे कक्षों में बैठेंगे, कहां भोजन पकेगा और कहां बैठकर बच्चे खाएंगे। पहले दिन सफाई और जलभराव की समस्या कैसे निपटेगी आदि सवालों के जवाब किसी के पास नहीं है।
परिषदीय विद्यालयों के संचालन को लेकर असमंजस की स्थिति रही। ग्रीष्मावकाश शुरू होने से पहले तक भीषण गर्मी के चलते स्कूल संचालन का समय बदल दिया गया था। अब स्कूल खुलने पर क्या समय रहेगा, इस पर तरह-तरह की चर्चाएं रहीं। खंड शिक्षा अधिकारी राही बृजलाल ने बताया कि विद्यालय संचालन का समय सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक रहेगा।