नेपाल और बांग्लादेश में नशीली दवाओं की तस्करी से जुड़े कफ सिरप कांड में आर्पिक फार्मा का संचालक मनोहर जायसवाल ईडी के सामने पेश नहीं हुआ। जांच में सामने आया है कि फर्जी फर्मों के जरिए कई राज्यों और पड़ोसी देशों में नशीली दवाओं की खेप भेजी गई थी, जिस पर ईडी और अन्य एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं।
नेपाल और बांग्लादेश में नशीली दवाओं की तस्करी करने वाली गुजरात की आर्पिक फामास्युटिकल्स कंपनी का संचालक मनोहर जायसवाल मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश नहीं हुआ। ईडी ने मनोहर और उसकी पत्नी अर्चना जायसवाल को तलब किया था। दोनों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) की ओर से नारकोटिक्स एक्ट के तहत अलग-अलग जिलों में 12 एफआईआर दर्ज कराई गई थीं, जिसके बाद ईडी ने बीते सप्ताह कंपनी के गुजरात और लखनऊ के ठिकानों पर छापा मारा था।
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ईडी द्वारा अहमदाबाद में मनोहर जायसवाल के आवास पर छापे के दौरान भी वह भाग निकलने में कामयाब हो गया था। दरअसल, उसकी जांच गुजरात का नारकोटिक्स विभाग भी कर रहा है। यूपी में कई मुकदमे दर्ज होने के बाद से वह एजेंसियों को चकमा दे रहा है।
इससे पहले एफएसडीए ने भी कंपनी को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब-तलब किया था, लेकिन उसे संतोषजनक जवाब और दस्तावेज मुहैया नहीं कराए गए थे। जांच में सामने आया था कि उसने सहयोगी कंपनी इथिका लाइफ साइंसेज से भी नशीली दवाओं की खेप प्रदेश के कई जिलों के साथ बिहार, पश्चिम बंगाल, नेपाल और बांग्लादेश भेजी थी।
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दवाओं की बिक्री के बिल ऐसी फर्मों के नाम पर काटे गए थे, जो कई वर्ष पहले ही बंद हो चुकी थी अथवा सत्यापन के दौरान उन्होंने आर्पिक फार्मा और इथिका लाइफ साइंसेज से दवाएं मंगाने से साफ इंकार कर दिया था। जांच में राजधानी निवासी दीपक मनवानी का नाम भी सामने आया था, जिसके पास नशीली दवाओं की खेप बरामद हुई थी।