डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल में मरीज कफ सिरप के लिए भटकता रहा लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी।
घंटो के इंतजार के बाद जब ओपीडी में डॉक्टर ने दवा लिखी तो औषधि वितरण केंद्र पर मौजूद दवा वितरक ने दवा न होने की बात कहकर स्टोर जाने की बात कह दी।
बुजुर्ग जब स्टोर गए तो वहां पर मौजूद स्टोरकीपर ने दवा कांउटर पर दवा मिलने की बात कहकर वापस कर दिया। कई दफा चक्कर लगाने के बाद मरीज बिना दवा लिए ही वापस चला गया।
जियामऊ के सुरेंद्र प्रताप (56) को कई दिनों से हल्के बुखार के साथ सूखी खांसी आ रही थी। इसी का इलाज कराने के लिए सुरेंद्र सुबह करीब साढे़ ग्यारह बजे फिजीशियन डॉक्टर से इलाज और चिकित्सकीय परामर्श लेने के बाद दवा काउंटर पर पहुंचे।
दवा काउंटर पर मौजूद फार्मासिस्ट ने सभी दवाएं दे दी लेकिन खांसी के लिए लिखी गई कफ सिरप स्टोर से लेने की बात कहकर बुजुर्ग को वापस कर दिया।
सुरेंद्र स्टोर पहुंचे तो वहां मौजूद स्टोर कीपर ने उनको दवा लेने के लिए औषधी वितरण केंद्र पर भेज दिया। वहां पर जाने पर पता चला कि कफ सिरप यहां पर खत्म हो गई है स्टोर से ले लो।
अस्पताल के कर्मचारियों की इस हरकत की वजह से नाराज सुरेंद्र ने उनको बुरा भला कहते हुए वहां से चलते बने। उन्होंने बताया कि दवा है या नहीं इसको हमको क्या मतलब। देना आपको है तो आप व्यवस्था करिए नहीं तो सीधे कह दीजिए की दवा नहीं है।