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महंगे रिफाइंड से मुश्किल में नमकीन इंडस्ट्री, नो प्रॉफिट नो लॉस पर चल रहे कारोबारी

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राजधानी में महंगे रिफाइंड की मार से दालमोठ, आलू भुजिया जैसे अन्य नमकीन उत्पाद बनाने वाले 50 फीसदी यानी 110 से ज्यादा छोटे-मझोले कारखाने बंद हो गए हैं।
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उधर, सभी 25 बड़े कारखानों में भी 40 फीसदी तक उत्पादन घट गया है। ये नो प्रॉफिट नो लॉस पर चल रहे हैं।
कारोबारियों के मुताबिक कारखानों में मसूर की दालमोठ, नमकीन सेव, रायता बूंदी सहित कई नमकीन उत्पाद रिफाइंड के जरिये तैयार होते हैं।
रिफाइंड महंगा होने से नमकीन तैयार करने की लागत 25 फीसदी बढ़ने और स्पर्धा के चलते उत्पाद की कीमत न बढ़ने से छोटे कारखाना चलाना मुश्किल हो गया। नमकीन की पहले जैसी खपत भी नहीं है।
पहले भुजिया एवं दालमोठ की स्कूल कैंटीन में काफी खपत थी, लेकिन कोविड के चलते मार्च से जनवरी तक स्कूल बंद रहने से मांग घट गई। इससे बड़े खारखानों में भी उत्पादन सिमट गया है।
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दूसरे कारोबार में लगे कई कारोबारी
भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ महानगर नगर इकाई के महामंत्री मनीष गुप्ता ने बताया कि रिफाइंड की महंगाई का 200 छोटे व मझोले कारखानों पर व्यापक असर पड़ा। लागत के साथ कीमत न बढ़ने से इनमें से 50 फीसदी कारखाने बंद हो गए हैं। छोटे कारखानों में रायता बूंदी, नमकीन सेव, दालमोठ तैयार होती है। छोटी पूंजी के इन कारोबारियों में से आधे लोग दूसरे कारोबार में लग गए हैं।
15 लीटर का रिफाइंड पांच माह में 500 रुपये महंगा
ऑल इंडिया फेडरेशन स्वीट व नमकीन मैन्युफैक्चरर्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं अमौसी के उद्यमी वासुदेव चावला ने बताया कि पांच माह में 15 लीटर रिफाइंड टिन 500 रुपये तक महंगा हो चुका है। इससे नमकीन बनाने की लागत 25 फीसदी तक बढ़ चुकी है। कारोबार में प्रतिस्पर्धा होने के कारण उत्पाद की कीमत भी नहीं बढ़ा सके। कारोबार में संकट खड़ा हो गया है।
सितंबर में 1400 रुपये में था रिफाइंड
गणेशगंज के किराना कारोबारी संजय जेसवानी ने बताया कि सितंबर 2020 में 15 लीटर रिफाइंड टिन 1400 से 1500 रुपये का था। यह फरवरी में 1800 से 1900 रुपये का हो गया है। इसकी कीमत 2000 रुपये तक पहुंचने के बाद घटी है। संजय ने बताया कि नमकीन तैयार करने में सर्वाधिक रिफाइंड का ही इस्तेमाल होता है। रिफाइंड की कीमत क्यों बढ़ी, इसका कारण डीलर भी नहीं बता सका।
सस्ती मटर की आवक ठप, बढ़ी मुश्किल
उद्यमी वासुदेव चावला ने बताया कि नमकीन कारोबारियों पर महंगाई की दोतरफा मार पड़ी है। नमकीन इंडस्ट्रीज में सफेद मटर की बहुत खपत है। यह पहले कनाडा से 30 से 32 रुपये प्रति किलो मिल जाती थी। इस मटर की आवक ठप होने से स्वदेशी मटर 70 से 75 रुपये किलो खरीद कर नमकीन तैयार कर रहे। इसके साथ ही पैकेजिंग लागत भी पहले से बढ़ गई है।
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कुल कारखाने 250
बड़े 25
मझोले 50
छोटे 175
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