फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भर्ती में भ्रष्टाचार: नियुक्ति पत्र में हेराफेरी कर बन गए एक्सरे टेक्नीशियन, महानिदेशालय तक जुड़े रैकेट के तार

Sat, 20 Sep 2025 10:18 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

एक्सरे टेक्नीशियन भर्ती में भ्रष्टाचार के मामले में नया खुलासा हुआ है। नियुक्ति पत्र में हेराफेरी करके पद हासिल किया गया। साजिश के तहत कार्यभार ग्रहण करने वालों ने घर का पता भी गलत दिया। रैकेट के तार सीएमओ ऑफिस से लेकर महानिदेशालय तक जुड़े हैं।  
विज्ञापन
Job (Demo) - फोटो : freepik
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

स्वास्थ्य विभाग में एक्सरे टेक्नीशियन भर्ती 2008 में नियुक्ति पत्रों में हेराफेरी की गई थी। इतना ही नहीं साजिश के तहत कार्यभार ग्रहण करने वालों ने अपने घर का पता भी गलत दिया। कुछ पकड़ में भी आए, लेकिन महानिदेशालय की मिलीभगत से पहले से तयशुदा रणनीति के तहत मात देते हुए नौकरी करते रहे।

विज्ञापन


अमर उजाला ने 13 सितंबर को खुलासा किया कि 2008 की एक्सरे टेक्नीशियन भर्ती में चयन 79 का हुआ, जबकि 140 नियुक्ति दी गई। अब इस मामले में जांच शुरू हो गई है। महानिदेशक डॉ. रतनपाल सिंह सुमन के निर्देश पर निदेशक (नर्सिंग) की अध्यक्षता में गठित टीम जांच में लगी है। इस बीच विभिन्न जिलों के सीएमओ से रिपोर्ट मांगी गई है। सूत्रों की मानें तो अब तक की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि फर्जीवाड़ा करने वाले रैकेट ने पूरी रणनीति के तहत फर्जी नियुक्ति कराई। रैकेट के तार महानिदेशालय से लेकर सीएमओ कार्यालय तक जुड़े हैं।

नाम बदला और जारी कर दिया नियुक्ति पत्र

अमर उजाला के हाथ दो नियुक्ति पत्र लगे हैं। इसमें एक नियुक्ति पत्र 25 अगस्त 2008 को जारी हुआ। इसमें क्रम संख्या तीन, अनुक्रमांक एक्स आर 5035 लिखा है। अभ्यर्थी का नाम फुरकान खान, पता सिसेंडी लखनऊ, नियुक्ति स्थान सीएमओ सीतापुर के अधीन लिखा गया है।

79 के परीक्षा परिणाम में इनका विवरण मौजूद है। इसी तरह दूसरे नियुक्ति पत्र की 79 की सूची से मिलान किया गया तो विवरण नहीं मिला। नियुक्ति तिथि 20 सितंबर 2008 लिखा है। क्रम संख्या 67 पर अनुक्रमांक एक्सआर 5365 लिखा है। नाम पुष्पेंद्र सिंह, पता कंचनपुर जिला मैनपुरी नियुक्ति मुख्य चिकित्साधिकारी बलिया के अधीन लिखा है। लेकिन परीक्षा परिणाम वाली सूची में क्रम संख्या 67 पर नाम हरिमोहन, पता आगरा का दर्ज है।
विज्ञापन

जांच के दौरान आवास का पता मिला फर्जी

फर्जी भर्ती से जुड़े रैकेट में शामिल लोगों ने अभ्यार्थियों के पते गलत दिए हैं। विभागीय जानकार बताते हैं कि इसके पीछे भी पुख्ता रणनीति है। फर्जी पता देने से पकड़े जाने के बाद विभाग नोटिस भेजेगा तो यह स्वीकृत नहीं होगी। ऐसे में ये अभ्यर्थी बाद में नोटिस नहीं मिलने की बात कहते हुए कोर्ट चले जाते हैं। 

विभाग लचर रवैया अपनाता है और पुख्ता सबूत नहीं रख पाता। ऐसे में उन्हें राहत मिल जाती है। 2008 के प्रकरण में अब तक की गई पड़ताल में यह बात सामने आई है कि अभ्यर्थी जहां का पता लिखते हैं, वहीं का फर्जी प्रूफ भी तैयार कर लेते हैं। कन्नौज के सीएचसी तालग्राम में कार्यरत मनोज का पता फिरोजाबाद के शिकोहाबाद का लिखा है, जबकि वह कन्नौज के जलालाबाद क्षेत्र के अटारा का रहने वाला है। 

इनका भी पता निकला फर्जी

बदायूं के सीएचसी उसवा में कार्यरत सुधीर का पता धुमरी सिद्धपुर रोड एटा लिखा है, जबकि वह एटा जिले के अलीगंज क्षेत्र के लड़सिया उर्फ लुतफुल्लापुर का निवासी है। चंदौली के सीएचसी चकिया में कार्यरत विनोद का पता एटा जिले के जलालापुर रामनगर लिखा है, जबकि वह एटा जिले के अलीगंज के जैथरा निवासी है। इसी तरह अन्य के निवास प्रमाण पत्र में भी हेराफेरी की गई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें