लखनऊ। कोरोना को लेकर मची हलचल का असर सप्ताह भर बाद कम होने की उम्मीद है। इसके लिए लोगों को अपने स्तर पर लॉकडाउन के नियमों का पालन करना होगा। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में लगी टीमें लोगों को जागरूक भी कर रही हैं। लोगों से अपील की गई है कि बहुत जरूरी हो तभी बाहर निकलें।
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल के पहले सप्ताह में पॉजिटिव होने वाले दूसरे सप्ताह के बाद नेगेटिव होने की ओर बढ़ने लगेंगे। वहीं, डेडिकेटेड हॉस्पिटल की संख्या भी बढ़ाए जाने से नए मरीजों और डिस्चार्ज होने वालों में अंतर कम होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस दौरान हर व्यक्ति को सेल्फ लॉकडाउन पर जोर देना होगा। इससे वायरस की चेन टूटेगी। वहीं, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में लगी टीम को निर्देश दिया गया है कि सैंपल लेते वक्त परिवार का पूरा ब्यौरा लिया जाए। लोगों को कम से कम बाहर निकलने, मास्क का प्रयोग करने और सैनिटाइजेशन की सलाह दी जा रही है।
महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. डीएस नेगी ने बताया कि कोरोना से बचाव को दवाओं का इंतजाम, बेड बढ़ाने, वेंटिलेटर सहित सभी प्रयास किए जा रहे हैं। केजीएमयू और बलरामपुर को डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल बनाने की तैयारी है। कुछ निजी संस्थान को भी अधिग्रहीत किया गया है। दूसरी तरफ लोगों को सेल्फ लॉकडाउन के प्रति प्रेरित किया जा रहा है। कम से कम बाहर निकलें और मास्क का नियमित प्रयोग करें तो वायरस की चेन टूट जाएगी। उम्मीद है कि अगला सप्ताह राहत भरा होगा।
जरूरी ना हो तो न निकलें बाहर
चिकित्सा अधीक्षक लोहिया संस्थान डॉ. विक्रम सिंह का कहना है कि इस वक्त संक्रमण तेजी से फैल रहा है। ऐसे में बहुत जरूरी ना हो बाहर न निकलें। सरकार ने लॉकडाउन नहीं लगाया है, लेकिन सेल्फ लॉकडाउन मानकर हम वायरस की चेन तोड़ सकते हैं। चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों में बेडों की संख्या बढ़ाई जा रही है, लेकिन खुद जागरूकता दिखानी होगी। यदि लोगों ने लॉकडाउन के नियमों का पालन किया तो अगले सप्ताह से हालात में सुधार दिखने लगेंगे।