सीडब्ल्यूसी सदस्य डॉ. संगीता शर्मा ने बताया कि 29 लड़कियों को शिफ्ट करने की तैयारी पूरी हो गई है। मानसिक दिव्यांग और गर्भवती को बालगृह में ही आइसोलेट रखा जाएगा। कहीं व्यवस्था न होने पर राज्य बाल आयोग और बाल कल्याण समिति ने सेवा भारती अवध प्रांत से संपर्क किया। उन्होंने बालिकाओं को निरालानगर स्थित सेंटर में शिफ्ट करने की अनुमति दे दी है। अधीक्षिका रीता टंटा से बात करने की कोशिश की गई, पर उनका फोन लगातार पहुंच से बाहर रहा।
65 अन्य पर संक्रमण का खतरा
बालगृह बालिका में 97 बालिकाएं हैं। संक्रमित पाए जाने के बाद बालिकाओं को भले ही दो कमरों में रखने की बात की जा रही हो, लेकिन इनके एक ही परिसर में रहने से अन्य बालिकाओं में संक्रमण फैलने का खतरा है। डीपीओ जयपाल वर्मा ने कहा कि लगातार निगरानी और सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। जितनी जगह है उसमें संक्रमितों को आइसोलेट करके रखा गया है। देर से शिफ्टिंग पर उन्होंने कुछ नहीं कहा।
ये है बालगृहों की फैक्ट फाइल
28 बाल गृह हैं राजधानी में, निजी-सरकारी मिलाकर
05 बालगृह बालिकाएं हैं शहर में
02 बालगृह बालिका की क्षमता 50
02 बालगृह बालिका की क्षमता 25
01 बालगृह बालिका की क्षमता 100
50 फीसदी होनी चाहिए कोविड काल में रहने वालों की संख्या, अभी क्षमता से अधिक हैं।