बलरामपुर अस्पताल प्रशासन की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। एक बिल्डिंग के दूसरे तल पर संदिग्ध रोगी भर्ती किए जा रहे हैं तो वहीं पहले तल पर सामान्य रोगी भर्ती हो रहे हैं। वार्ड में प्रवेश का एक ही गेट है। ऐसे में सामान्य रोगी की सेहत संग अस्पताल खिलवाड़ कर रहा है।
अफसरों का कहना है कि हाई रिस्क वाले मरीजों को दूसरे तल पर रखा जा रहा है, जबकि सामान्य रोगी के लिए ग्राउंड फ्लोर पर है। बलरामपुर अस्पताल में 756 से अधिक बेड की क्षमता है जो इस लिहाज से जिले का सबसे बड़ा अस्पताल है। लॉकडाउन शुरू होते ही अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी व भर्ती पर रोक लगा दी थी। शासन ने अस्पताल को कोविड अस्पताल से बाहर कर दिया है। इसके बाद यहां सामान्य मरीजों की भर्ती शुरू हुई है।
अस्पताल में भर्ती के लिए न्यू प्राइवेट वार्ड खोला गया है। आरोप है कि सभी वार्ड में ताला जड़ दिया गया है। इमरजेंसी में भर्ती होने के बाद मरीजों को न्यू प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट कराया जा रहा है। कोविड नियमों का खुला उल्लंघन अस्पताल में हो रहा है। संदिग्ध रोगी को प्राइवेट वार्ड के दूसरे तल पर रखा जा रहा है। जबकि कम रिस्क वाले सामान्य रोगी ग्राउंड फ्लोर पर भर्ती किए जा रहे हैं। ऐसे में कोई भी पॉजिटिव केस निकलने पर सामान्य रोगी भी प्रभावित हो सकते हैं। अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि अस्पताल कोविड की श्रेणी में नहीं है। फिर भी कोविड के सभी नियमों का पालन किया जा रहा है।