बदलते जमाने में कोऑपरेटिव बैंक भी खुद को बदलने की तैयारी में जुट गई है।
एक ओर जहां बैंकों को व्यावसायिक बैंकों की तरह सजा-संवारने की योजना है तो दूसरी ओर उपभोक्ताओं को अधिक से अधिक सुविधा मुहैया कराने का भी फैसला किया गया है।
सिर्फ किसानों को ऋण देने वाली बैंक की पहचान को बदलकर अब इसे आम उपभोक्ता बैंक का स्वरूप प्रदान किया जाएगा।
लोग मकान, कार व कारोबार के लिए भी बैंक से ऋण ले सकेंगे तो एटीएम से पैसे निकालने की सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी।
यही नहीं कोऑपरेटिव बैंक के कर्मचारियों को भी लगभग उसी तरह की सुविधाएं दी जाएंगी, जैसी व्यावसायिक बैंक अपने कर्मचारियों को देते हैं।
जिनमें सामान्य उपभोक्ता ऋण के साथ-साथ संतानों के लिए शिक्षा ऋण भी शामिल है। बैंक के पुराने भवनों की जगह नया भवन बनाकर व्यावसायिक इस्तेमाल की योजना भी है।
जिससे बैंक देखने में सुंदर लगे और उन्हें निजी संस्थाओं को किराए पर देकर बैंकों की आमदनी बढ़ाई जा सके।
इसका प्रारंभ कानपुर स्थित डीएवी कॉलेज शाखा से होगा। इस शाखा के भवन को गिराकर वहां बहुमंजिला इमारत बनाई जाएगी।
जिसका एक हिस्सा बैंक अपने इस्तेमाल में लाएगी। बाकी को किराए पर देकर व्यावसायिक इस्तेमाल किया जाएगा।