फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘कलाम स्पिरिट’ के ये 5 मंत्र अापको हर क्षेत्र में बनाएंगे सफल, यहां पढ़ें-

Sat, 13 Oct 2018 10:40 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
एकेटीयू के दीक्षांत समारोह में मेधावियों के साथ राज्यपाल राम नाई, पद्मविभूषण डॉ. रघुवर अनंत माशेलकर व अन्य। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के 16वें दीक्षांत समारोह में प्रख्यात वैज्ञानिक, ग्लोबल रिसर्च एलायंस के अध्यक्ष व पद्मविभूषण डॉ. रघुवर अनंत माशेलकर ने युवाओं से ‘कलाम स्पिरिट’ के साथ सफलता के रास्ते पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
विज्ञापन


शुक्रवार को आयोजित समारोह में उन्होंने व राज्यपाल राम नाईक ने अजय कुमार गर्ग इंजीनियरिंग कॉलेज, गाजियाबाद की बीटेक की छात्रा प्रीति गुप्ता को चांसलर मेडल समेत 67 मेधावियों को मेडल प्रदान किए।

डॉ. माशेलकर ने उपाधि धारकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, यह आपके लिए गर्व का क्षण है। साथ ही उन अभिभावकों के लिए भी जिन्होंने अपने बच्चों को यह जीवन भर का तोहफा दिया है। आज से 50 साल पहले जब मैं स्नातक हुआ था तो भारत विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने के लिए संघर्ष कर रहा था। आज जब आप स्नातक हो रहे हैं तब भारत विश्व का तीसरा सबसे शक्तिशाली देश है। आप एक और बेहतर भविष्य का निर्माण करें।
विज्ञापन


उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के साथ बिताए समय और संस्मरणों का उल्लेख करते हुए कहा, वे एक महान गुरु, मार्गदर्शक, दोस्त और दार्शनिक थे। मैं उनके द्वारा दिए पांच ऐसे मंत्र बताऊंगा जिन्होंने मेरे जीवन को सरल बनाया, ये आपके जीवन में भी काम आएंगे। हमें डॉ. कलाम के मंत्र आई कैन, वी कैन, इंडिया कैन व इंडिया विल के विजन पर काम करने के लिए प्रेरित होना चाहिए। हमेशा ऊंचा सोचो और ऊंचा करो। 

डॉ. माशेलकर ने पिछले दिनों एशियन गेम्स में मेडल जीतने वाली स्वप्ना बर्मन और पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा का जिक्र करते हुए कहा कि मनुष्य की उपलब्धियों की कोई सीमा नहीं होती। बस खुद पर भरोसा होना चाहिए। इस अवसर पर प्राविधिक व चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन, कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक, प्रति कुलपति प्रो. कैलाश नारायण, सचिव प्राविधिक शिक्षा भुवनेश कुमार उपस्थित थे।
विज्ञापन

‘कलाम स्पिरिट’ के पांच मंत्र

माशेलकर को डीएससी की मानद उपाधि देते राज्यपाल। - फोटो : amar ujala
आपकी आकांक्षा ही आपकी संभावना है। इसलिए इसे हमेशा ऊंचा रखें।
दृढ़ता हमेशा भुगतान करती है। इसलिए किसी भी काम को तुरंत न छोड़ें या हार न मानें।
समाधान का हिस्सा बनें न कि समस्या का। संभावनाओं के द्वार न तलाशें, खुद संभावनाओं के द्वार खोलें।
कॉफी तो तुरंत मिल सकती है लेकिन सफलता नहीं। कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है।
मनुष्य के धैर्य की कोई सीमा नहीं होती, उसकी उपलब्धियों की, उसके सोचने की भी। इसलिए खुद पर भरोसा रखें।

यह मेरी 40वीं मानद उपाधि
समारोह में एकेटीयू ने माशेलकर को डीएससी की मानद उपाधि प्रदान की। अपने उद्बोधन में माशेलकर ने कहा कि अब तक उन्हें 39 मानद उपाधि मिल चुकी हैं। आज 40वीं मिल रही है। 30वीं मानद उपाधि लखनऊ में ही लखनऊ विश्वविद्यालय में मिली थी और 40वीं भी लखनऊ में ही मिल रही है।  

सृजन पाल सिंह को विशिष्ट भूतपूर्व छात्र पुरस्कार
डॉ. कलाम के करीबी, उनके साथ काम करने वाले लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता सृजन पाल सिंह को एकेटीयू का विशिष्ट भूतपूर्व छात्र पुरस्कार दिया गया। यह पुरस्कार विवि ने इसी साल शुरू किया है। सृजन पाल इस समय विश्वविद्यालय के डॉ. कलाम इनोवेशन सेंटर के वरिष्ठ परामर्शी भी हैं।  
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें