लखनऊ। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि विलुप्त हो रहे वाद्ययंत्रों, लोकगीतों के संरक्षण और शोध की बेहद आवश्यकता है। इन पर कार्य किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ी को इसके बारे में बताया जा सके। वे भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहीं थीं। इस मौके पर उन्होंने 110 मेधावियों को उपाधियां व 45 पदक प्रदान किए। इनमें 28 स्वर्ण पदक, नौ रजत और आठ कांस्य पदक शामिल रहे।
सोमवार को भातखंडे विवि का 13वां दीक्षांत समारोह विवि परिसर स्थित कला मंडपम में संपन्न हुआ। राज्य विवि बनने के बाद यह यहां का दूसरा दीक्षांत समारोह था। तीन पीएचडी शोधार्थियों को भी डिग्री दी गई। राज्यपाल ने विवि की कुलपति को निर्देश दिए कि वह संगीत शिक्षा के पाठ्यक्रम में संगीत के माध्यम से गर्भाधान संस्कार विषय को भी जोड़ें। इससे नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत होने वाली गर्भवतियों को इसका लाभ मिल सकेगा। राज्यपाल ने भातखंडे विवि को शहर के अन्य विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू करने की सलाह भी दी।
कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने सभी पदक एवं उपाधिधारकों को शुभकामनाएं देते हुए दीक्षा उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिंदगी खूबसूरत होने के साथ ही चुनौतीपूर्ण है। यहां लड़ना भी आपको अकेले है और जीतना भी। इसलिए वह एकाग्रचित होकर अपने लक्ष्य पर ध्यान दें। कार्यक्रम में कुलसचिव सृष्टि धौन भी मौजूद रहीं।
दुनिया भर में भातखंडे का नाम रोशन करें : पद्मश्री शोभना नारायण
मुख्य अतिथि प्रख्यात कथक नृत्यांगना पद्मश्री शोभना नारायण ने उपाधि व पदक धारकों से कहा कि विवि ने उन्हें बेहतर स्किल और शैक्षिक संस्कार देकर अपनी जिम्मेदारी निभा ली है। अब उन पर जिम्मेदारी है कि वह अपने किरदार की खुशबू से दुनिया भर में विवि का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि लखनऊ उनकी पसंदीदा जगहों में से एक है और उन्हें यहां बहुत अच्छा लगता है। इसका कारण है कि उनके गुरु पंडित बिरजू महाराज की यह कर्मभूमि है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वर्तमान समय तकनीक का है, यहां बहुत गलत सूचनाएं प्रसारित हो रही हैं, जिन्हें सत्य मान लिया जाता है। विद्यार्थियों को न्यायिक बुद्धि के इस्तेमाल से इसे समझना होगा और गलत सूचनाओं से दूरी बनानी होगी।
दो लेक्चर ले लेना फिर छुट्टी, यह नहीं चलेगा
राज्यपाल आनंदीबेन ने विवि के शिक्षकों को नसीहत देते हुए कहा कि यहां के शिक्षक दो कक्षाएं लें फिर विद्यार्थियों की छुट्टी कर दें, यह नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि विवि के शिक्षक सामाजिक गतिविधियों से जुड़े आंगनबाड़ी, प्राथमिक विद्यालय के बच्चों और उनकी शिक्षा के लिए भी कार्य करें। राज्यपाल ने कुलपति को नैक तैयारियों के साथ अगले माह राजभवन बैठक के लिए बुलाया। साथ ही इसके लिए शिक्षकों की समिति भी गठित करने के निर्देश दिए।
आठ स्वर्ण पाकर कनक सी चमकी कनक
दीक्षांत समारोह में सर्वाधिक आठ स्वर्ण पदक एपीए कथक की छात्रा कनक कुलश्रेष्ठ को मिले। इसके साथ ही एपीए गायन में सोनल शुक्ला और बीपीए गायन में पवन कुमार को चार-चार पदक, एपीए गायन में सृष्टि अवस्थी, एमपीए सितार में सर्वजीत सिंह, बीपीए तबला मोहित सिंह और एमपीए भरतनाट्यम में मलिका नवीन गुप्ता को तीन पदक, नरेंद्र कुमार वर्मा, विदुषी मिश्रा, तरुण कुमार पाल, रमनदीप सिंह को दो-दो पदक, वैभव कृष्ण पांडेय, कंचन मेहता, श्रीप्रकाश सिंह, पिंकी उपाध्याय, सक्षम श्रीवास्तव, राजश्री मिश्रा, अमृता श्वेतांबरी, मिल्की गुप्ता एवं तेजस्वी प्रजेश को एक-एक पदक दिया गया।
पदक धारकों से बातचीत
प्रोफेसर के साथ बनना है बेहतर कलाकार
पीजी कथक में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर सर्वाधिक आठ स्वर्ण पदक मिले हैं। इससे जीवन में आगे बढ़ने और कुछ नया करने का उत्साह मिला है। भविष्य में प्रोफेसर बनने के साथ ही कथक की बड़ी कलाकार बनना चाहती हूं। सफलता का श्रेय माता, पिता, परिवार व शिक्षकों को देती हूं। - कनक कुलश्रेष्ठ, आठ स्वर्ण पदक
पापा का सपना, पीएचडी में लूं दाखिला
पापा का सपना है कि मैं पीएचडी करके संगीत की अच्छी शोधार्थी बनूं। एमपीए वोकल (गायन) में अच्छा प्रदर्शन करने पर चार पदक मिले हैं। इसके लिए पिता प्रमोद कुमार का विशेष योगदान है। - सोनल शुक्ला, चार पदक
परास्नातक कर रहा हूं। आगे नेट जेआरएफ देकर पीएचडी में प्रवेश लेना है। बीपीए कोर्स में विवि में टॉप करने पर चार पदक मिले हैं। पिता शशिकांत डाक विभाग में हैं और माता विमलेश यादव गृहिणी हैं। - पवन कुमार, चार पदक
गुरुद्वारे से सीखा संगीत
एमपीए सितार में किया है। यही पैशन है और भविष्य भी इसी में बनाना है। बेहतर प्रदर्शन करने पर तीन पदक मिले हैं। गुरुद्वारे से संगीत सीखा फिर वहीं से पसंद बन गया। पिता सतपाल सिंह गुरुद्वारे में ही ग्रंथी हैं। - सर्वजीत सिंह
मौका मिला तो बॉलीवुड में जाऊंगी
विवि में तीसरी और विभाग में दूसरी टॉपर हूं। दो पदक मिले हैं। भविष्य में शिक्षक बनने के साथ के संगीत को और बेहतर करने के साथ ही उसे निखारने ख्वाब है। मौका मिला तो बॉलीवुड में भी प्रवेश करूंगी। - सृष्टि अवस्थी, दो पदक
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संगीत को ले जाना है
पांच वर्ष की मेहनत के बाद पीएचडी की उपाधि मिली है। अब एक ही सपना है कि भारतीय लोक संगीत को दुनिया के उच्चतम शिखर तक पहुंचाऊं। - मेधा उप्रेती, पीएचडी उपाधि धारक