बाराबंकी के थाने में जलाई गई महिला की मौत के बाद खूब हंगामा हुआ। प्रशासन से इससे जुड़ी कई मांगे की गईं।
कोठी थाने में जिंदा जलाई गई महिला ने लखनऊ के सिविल अस्पताल में मंगलवार तड़के 3.40 बजे दम तोड़ दिया। शव लेकर लौटे परिवारीजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी, 30 लाख रुपये मुआवजा व परिवार के एक सदस्य को नौकरी की मांग को लेकर कैसरगंज चौराहे पर प्रदर्शन किया।
डीम योगेश्वर राम मिश्र ने उनकी मांगों पर विचार का आश्वासन देकर प्रदर्शन खत्म कराया। देर शाम उसका अंतिम संस्कार किया गया। महिला के पति को पुलिस ने अवैध तरीके से कोठी थाने में बैठा रखा था, उन्हें छुड़ाने की फरियाद लेकर सोमवार को वह थाने गई थी।
जहां थानेदार रायसाहब यादव और दरोगा अखिलेश राय ने दुष्कर्म में नाकाम रहने पर उसे पेट्रोल डालकर जला दिया था। पीड़िता की मौत के बाद हरकत में आए प्रशासन डैमेज कंट्रोल में जुटा रहा, हालांकि 36 घंटे बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
मंगलवार सुबह डीआईजी वीके गर्ग और मंडलायुक्त एसपी मिश्र ने पीडब्ल्यूडी गेस्टहाउस में डेरा डाल दिया। आईजी जकी अहमद भी पहुंचे। ज्ञापन देने आए पत्रकारों को आईजी और मंडलायुक्त ने मामले में कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
आईजी ने कहा कि थानाध्यक्ष के रवैये से आहत महिला ने खुद को आग लगा ली थी। उधर दोषी पुलिसकर्मियों को फांसी की मांग कर रहे बेटे ने कहा कि उसके बेगुनाह पिता को अवैध तरीके से हिरासत में ले रखा था।
एसपी बाराबंकी व अन्य अधिकारियों से शिकायत की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। एसओ ने एक लाख की मांग की थी। उसकी मां दस हजार रुपये लेकर थाने पहुंची।