चलती ट्रेनों में यात्रियों का सामान चोरी हो जाए या फिर महिला यात्रियों के साथ अभद्रता व छेड़खानी हो।
दुनिया के किसी भी कोने से आपराधिक घटना की विवेचना की प्रगति जानना हो या उस मामले की रिपोर्ट हासिल करनी हो।
अब सब कुछ सामने होगा और वह भी चंद मिनटों में। रेलवे अधिक आपराधिक घटनाओं वाले स्थानों को चिन्हित करेगा।
चिन्हित होंगे रास्ते
साथ ही ऐसे अपराधों पर रेलवे बोर्ड अब सीधी नजर भी रखेगा। रेलवे अपने सभी 17 जोन के रेल मंडलों के आरपीएफ कंट्रोल रूम को ऑनलाइन करने जा रहा है। कंट्रोल रूम से अपराधों का ब्यौरा जुटाकर अधिक घटनाओं वाले रेलखंडों को चिन्हित किया जाएगा।
इन रेलखंडों पर अपराध रोकने के लिए स्पेशल इंटेलिजेंस ब्यूरो और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों की तैनाती की जाएगी। रेलवे इसके लिए आरपीएफ सिक्यूरिटी मैनेजमेंट सिस्टम (आरएसएमएस) प्रोजेक्ट लागू करने की तैयारी कर रहा है।
रेलवे बोर्ड ने 2011-12 में आरएसएमएस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। चार जुलाई 2011 को इसके लिए एमओयू भी साइन हुआ। 2012-13 में इसका पायलट प्रोजेक्ट मध्य रेलवे और पश्चिमी रेलवे में शुरू किया गया था।
17 जोन से मांगी जाएगी रिपोर्ट
इसकी सफलता के बाद रेलवे बोर्ड ने फरवरी 2013 में आरएसएमएस के जरिए देश के सभी 17 जोन का ऑनलाइन अपराधिक रिकार्ड मंगाकर उनके रेल मंडलों में हुए एक माह के अपराध का ब्यौरा एकत्र कर लिया है।
अब बोर्ड ने सभी रेल मंडलों के आरपीएफ कंट्रोल रूम को ऑनलाइन करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके लिए बोर्ड ने 28.65 करोड़ रुपये स्वीकृत भी कर दिए हैं।
इस धनराशि से सभी रेल मंडलों के कंट्रोल रूम में कम्प्यूटर लगाने के साथ उसे ऑनलाइन किया जाएगा।