लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के यूरोलॉजी विभाग में महिला मरीज से छेड़छाड़ के आरोपी संविदा आयुष डॉक्टर को नौकरी से निकाल दिया गया है। इसके साथ ही ड्यूटी पर तैनात वार्ड आया को भी बर्खास्त कर दिया गया है, क्योंकि अल्ट्रासाउंड के दौरान उसकी मौजूदगी अनिवार्य थी। घटना के बाद निर्देश जारी किया गया है कि अब अल्ट्रासाउंड केवल महिला कर्मी की उपस्थिति में ही होगी। आरोपी डॉक्टर को निजी एजेंसी ने पीपीपी मॉडल पर मशीन चलाने के लिए तैनात किया था।
काकोरी निवासी पीड़िता ने एक अप्रैल को यूरोलॉजी विभाग में अल्ट्रासाउंड के दौरान आयुष डॉक्टर पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। पीड़िता की लिखित शिकायत के बाद भी अधिकारियों ने मामले को दबाने का प्रयास किया। महिला के लगातार संघर्ष के बाद केजीएमयू प्रशासन ने पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई, जिसने पीड़िता के आरोपों को सही पाया। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी डॉक्टर को हटा दिया गया है। साथ ही वार्ड आया को भी बर्खास्त कर दिया गया है
यूरोलॉजी विभाग में पीपीपी मॉडल पर सवाल
केजीएमयू में रेडियोलॉजी विभाग होने के बावजूद यूरोलॉजी विभाग में करीब 20 वर्ष से पीपीपी मॉडल पर अल्ट्रासाउंड मशीनें संचालित हो रही हैं। निजी कंपनियां इनसे मोटी कमाई कर रही हैं, जबकि केजीएमयू को मामूली कमीशन मिलता है। प्रशासन को इसकी फिक्र नहीं है कि इन जांचों को कौन कर रहा है? घटना ने पीपीपी मॉडल के तहत होने वाली जांचों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।