प्राथमिक विद्यालयों में मिड-डे मील की गुणवत्ता हमेशा ही सवालों के घेरे में रहती है, लेकिन हद तो तब हो गई जब मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास के महज एक किलोमीटर के दायरे में स्थित जियामऊ प्राथमिक विद्यालय में भोजन में कीड़े मिले।
यह घटना दिखाती है कि अधिकारियों को किसी का भी डर नहीं है।
जब मुख्यमंत्री आवास के निकट बच्चों को ऐसा भोजन परोसा जा रहा है तो अन्य जगहों की स्थिति क्या होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
खाने का मेन्यू भी नहीं है तय
विद्यालय में मिड-डे मील देने का जिम्मा वर्ल्ड वेलफेयर सोसाइटी नामक एनजीओ को दिया गया है लेकिन न तो यहां कभी खाने का मेन्यू फॉलो किया जाता है और न ही समय से खाना आता है।
प्राथमिक विद्यालयों में नया सत्र सोमवार से शुरू हुआ है। अभी विद्यालय खुले दूसरा ही दिन है कि मंगलवार को बच्चों को जो खाना परोसा गया उसमें कीड़े निकले, इसके बाद प्रधानाचार्य नदीम सरताज ने तत्काल बच्चों को खाना खाने से रोक दिया।
एनजीओ पर नहीं होती है कोई कार्रवाई
बच्चों ने बताया कि विद्यालय में कभी भी अच्छा खाना नहीं परोसा जाता। अक्सर ही ऐसा होता है कि भोजन में रोटी नहीं मिलती। इसके अलावा दाल को देखकर ऐसा लगता है जैसे पानी में पीला रंग मिला दिया गया हो।
सूत्रों की मानें तो इस बारे में शिक्षा विभाग में कई बार शिकायत भी की गई है लेकिन एनजीओ पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कहने को तो विद्यालय में भोजन देने का समय सुबह 9.30 बजे का है लेकिन एनजीओ की ओर से 11 - 11.30 बजे तक भोजन उपलब्ध कराया जाता है जब तक कि आधे बच्चो जा चुके होते हैं।