लखनऊ। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम में सात माह से अध्यक्ष के पद पर किसी की नियुक्ति नहीं हो सकी है। इसके चलते यहां वादों का बोझ तो बढ़ ही रहा है, उपभोक्ताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वादकारियों को सिर्फ तारीख मिल रही हैं। यहां तकरीबन पांच हजार मामले आदेश के इंतजार में लंबित हैं।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम में अध्यक्ष का पद सितंबर 2025 में यहां तैनात नीलकंठ सहाय के जाने के बाद खाली हो गया था। अधिवक्ताओं का कहना है कि पूर्व अध्यक्ष का जीएसटी अपीलीय कोर्ट के लिए चयन होने के बाद से कोर्ट खाली है और पुराने मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। हालांकि, कुछ दिन पूर्व यहां यह व्यवस्था लागू की गई थी कि जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग- द्वितीय की अदालत में नियुक्त अध्यक्ष ही 15-15 दिनों के लिए दोनों जगह के मामलों की सुनवाई करेंगे।
इस संबंध में अधिवक्ता आरके त्रिवेदी का कहना है कि माह के पहले 15 दिन द्वितीय अदालत में अध्यक्ष सुनवाई करते हैं और माह की 16 तारीख से अंत तक प्रथम न्यायालय में बैठते हैं। प्रथम कोर्ट में पुराने मामलों की सुनवाई न होने से लंबी-लंबी तारीखें दे दी जाती हैं।
वहीं, एक अन्य अधिवक्ता राजेश गुप्ता ने बताया कि जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम में केवल दायर नए वाद की ही सुनवाई हो रही है, यहां न तो पुराने लंबित मामले सुने जा रहे हैं और न ही उनमें आदेश ही पारित हो रहे हैं। ऐसे में कोर्ट में वादों का बोझ बढ़ता जा रहा है। प्रथम न्यायालय में जल्द अध्यक्ष की नियुक्ति के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे सबसे ज्यादा नुकसान वादकारियों का हो रहा है। उन्हें समय से न्याय मिलने में अड़चन आ रही है। राजेश गुप्ता ने बताया कि यहां बहुत से ऐसे मामले हैं जो दस वर्ष से अधिक समय से आदेश के इंतजार में लंबित हैं।