लखनऊ। घर के बाहर से कार चोरी होने के बाद बीमा कंपनी ने शर्तें पूरी नहीं होने को आधार बनाते हुए क्लेम देने से मना कर दिया।
अब सुप्रीम कोर्ट से तय विधि व्यवस्था को आधार बनाते हुए जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को क्लेम राशि का 75 फीसदी भुगतान का आदेश किया है। इसके अलावा मानसिक कष्ट व विधिक खर्च के लिए अलग से हर्जाना भी देना होगा।
आशियाना के सेक्टर-एम निवासी अमित कुमार चौधरी ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत कर यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के खिलाफ वाद दर्ज कराया।
इसमें बताया गया कि सात सितंबर 2015 को उनकी कार घर के बाहर से चोरी हो गई। पुलिस अपराधी और वाहन का पता नहीं लगा पाई और सीजेएम कोर्ट में इसकी रिपोर्ट दे दी।
21 अक्टूबर 2016 को बीमा कंपनी ने उनका क्लेम बीमा पॉलिसी की शर्त पूरी नहीं करने को आधार बनाते हुए खारिज कर दिया। आयोग में बीमा कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। ऐसे में जिला उपभोक्ता आयोग ने एकपक्षीय कार्यवाही इस वाद में की।
जिला उपभोक्ता आयोग द्वितीय के अध्यक्ष अमरजीत त्रिपाठी और सदस्य प्रतिभा सिंह ने अपने आदेश में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपील 2703/2010 अमलेंदु साहू बनाम ऑरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के वाद में तय विधि व्यवस्था में शर्त पूरी नहीं होने पर 75 फीसदी क्लेम दिए जाने का आदेश है।
बीमा कंपनी ने शर्त पूरी नहीं करने को स्पष्ट नहीं किया है। ऐसे में शिकायतकर्ता कुल बीमित राशि 2.54 लाख रुपये का 75 फीसदी यानी 1.91 लाख रुपये धनराशि पाने का अधिकारी है।
2017 से अब तक नौ फीसदी ब्याज के साथ बीमा कंपनी यह भुगतान करे। इसके अलावा मानसिक कष्ट के लिए 25 हजार रुपये और विधिक खर्च के लिए अलग से 5000 रुपये का हर्जाना भी बीमा कंपनी शिकायतकर्ता को 30 दिन के अंदर भुगतान करे।