उपभोक्ता परिषद ने कहा कि सबसे ज्यादा घरेलू उपभोक्ता वाले राज्य में तेजी से सुधार हो रहा है, ऐसे में निजीकरण गलत है। यूपी में बिजली बेहतर प्रबंधन से सेवा में सुधार की जरूरत है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
उत्तर प्रदेश में 87 फीसदी घरेलू उपभोक्ता हैं। इसमें करीब 46 फीसदी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले हैं। इसके बाद भी बिजली व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है। ऐसे में निजीकरण प्रस्ताव रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि यहां सिर्फ एक फीसदी औद्योगिक कनेक्शन है। निजीकरण हुआ तो उसकी मार घरेलू उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगी। यह कहना है राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का।
विज्ञापन
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा पूरे देश में यूपी सर्वाधिक घरेलू उपभोक्ता वाला राज्य है। जिन राज्यों में औद्योगिक उपभोक्ता अधिक होते हैं वहां सुधार होना लाजिमी है लेकिन यूपी घरेलू उपभोक्ताओं के दम पर रेटिंग में सुधार कर रहा है। वर्ष 2021-22 में प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों की एटी एंड सी हानियां 31.19% थीं जो वर्ष 2024-25 में घटकर 19.21% रह गई।
वितरण हानियां वर्ष 2021-22 में 19.80% से घटकर वर्ष 2024-25 में 13.71% पर आ गई है। विधानसभा में ऊर्जा मंत्री ने टोरेंट पावर तथा नोएडा पावर कंपनी का उदाहरण देते हुए निजीकरण की आवश्यकता बताई गई थी लेकिन ये आंकड़े यह सिद्ध करते हैं कि उत्तर प्रदेश में निजीकरण की नहीं, बल्कि औद्योगिक शांति बनाए रखते हुए उपभोक्ता सेवा में सुधार, पारदर्शिता एवं बेहतर प्रबंधन के माध्यम से बिजली कंपनियों को सशक्त बनाने की आवश्यकता है।