निर्माण कार्यों के लिए दिए जाने वाले पैसे को बैंक में जमा करने पर मिलने वाला ब्याज कई निर्माण एजेंसियां दबाकर बैठ गईं। यह रकम करोड़ों में है। शासन ने निर्माण एजेंसियों से इस साल 31 मार्च तक मिले ब्याज और उसे राजकोष में जमा करने संबंधी ब्यौरा 24 जून तक तलब किया है।
इसी दिन निर्माण एजेंसियों के स्तर पर लंबित ब्याज की समीक्षा की जाएगी। एजेंसियों को हिदायत दी गई है कि ब्याज की जो रकम अब तक जमा नहीं की है उसे तत्काल राजकोष में जमा कराएं।
सरकारी विभाग निर्माण कार्यों के लिए जो पैसा देते हैं, निर्माण एजेंसियां उसे बैंक में जमा करती हैं और जरूरत के हिसाब से निकाल कर खर्च करती रहती हैं। बैंक में जमा रकम पर ब्याज मिलता रहता है। नियमानुसार यह ब्याज राजकोष में जमा कर दिया जाना चाहिए।
मगर, कई निर्माण एजेंसियां ऐसी हैं जिन्होंने काफी दिनों से ब्याज जमा नहीं किया। हाल में ब्याज के रकम को राजकोष में जमा किए जाने की पड़ताल शुरू हुई तो इसका खुलासा हुआ।
अब कई विभाग ब्याज के पैसे से सेस व आयकर का समायोजन करना चाहते हैं। ऐसी एजेंसियों को बताया गया है कि उन्हें इसके लिए कैबिनेट से अनुमति लेनी होगी।
राजकीय निर्माण निगम ने दबाया 152 करोड़
राजकीय निर्माण निगम ने पिछले दिनों पांच करोड़ रुपये जमा किए। 152.75 करोड़ रुपये अभी जमा करना बाकी है। विभाग इसी रकम में से 100 करोड़ लेबर सेस के रूप में समायोजित करना चाहता है।
यूपीएससीआईडीसी पर 71.22 करोड़ बाकी
यूपी स्टेट कांस्ट्रक्शन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कॉर्पोरेशन भी 71.22 करोड़ रुपये दबाए है। कॉर्पोरेशन भी लेबर सेस की बकाया रकम का समायोजन इसी पैसे से करना चाहता है। शासन ने इन्हें भी कैबिनेट से अनुमति मांगने का रास्ता सुझाया है।
आवास विकास परिषद ने नहीं जमा किया 21.90 करोड़
आवास एवं विकास परिषद को 31 मार्च तक 26.21 करोड़ रुपये ब्याज का राजकोष में जमा करना था। लेकिन मार्च में महज 4.31 करोड़ रुपये ही जमा किए। शासन ने इन्हें बाकी 21.90 करोड़ रुपये तत्काल खजाने में जमा कराने को कहा है।
सेतु निगम के पास सूचनाएं ही नहीं
सेतु निगम के पास ब्याज संबंधी कोई सूचना नहीं है। निगम के अफसरों ने बताया कि अभी तक 60 प्रतिशत सूचनाएं इकट्ठा की जा सकी हैं। शासन ने इन्हें छह करोड़ रुपये तत्काल जमा करने और पूरा ब्यौरा जुटाकर देने को कहा है।