दरअसल, बोर्ड को मिले कई प्रत्यावेदन में भूतपूर्व सैनिक श्रेणी का लाभ देने की मांग की गई है। उप्र लोक सेवा अधिनियम-1993 के नियम-2 (ग) में भूतपूर्व सैनिक की परिभाषा दी गई है। इसमें भारतीय थलसेना, नौसेना या वायुसेना में सेवा देने वाले शामिल हैं। भर्ती संबंधी बोर्ड की विज्ञप्ति में भी इसका प्रावधान किया गया था कि आरक्षण के लाभ के लिए आवेदन की अंतिम तिथि तक भूतपूर्व सैनिक होना अनिवार्य है।
अधिनियम के मुताबिक, भूतपूर्व सैनिक वह है जिसने पेंशन अर्जित कर सेवानिवृत्ति ली हो। चिकित्सीय आधार पर या नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों में निर्मुक्त व्यक्ति भी इसमें शामिल हैं। सैन्य सेवा में कमी के कारण बिना प्रार्थना निर्मुक्त हुए और ग्रेच्युटी पाने वाले भी पात्र हैं। टेरोटोरियल आर्मी के निरंतर सेवा के लिए पेंशन पाने वाले कर्मी भी भूतपूर्व सैनिक माने जाएंगे।
सैन्य सेवा के कारण चिकित्सीय रूप से अयोग्य या शौर्य पुरस्कार पाने वाले भी इस श्रेणी में आते हैं। आरक्षण का लाभ पाने के लिए संघ की तीनों सशस्त्र सेनाओं के किसी भी सैनिक के लिए आवश्यक है कि उसने आवेदन पत्र भरने के समय भूतपूर्व सैनिक का दर्जा पहले ही हासिल कर लिया हो।