पिछले दिनों घोषित सिपाही भर्ती 2013 के अंतिम परिणाम को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती बोर्ड ने न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं किया है। इससे चिकित्सा परीक्षण पास कर चुके करीब 11 हजार अभ्यर्थियों के साथ इंसाफ नहीं हुआ।
अभ्यर्थी सुभाष चौधरी ने कहा कि बीते 10 जून को जो अंतमि परिणाम घोषित किया गया है वह अपूर्ण है। रिट संख्या 3417/2017 उपेंद्र तोमर बनाम सरकार मामले में न्यायालय ने कहा था कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, होमगार्ड और भूतपूर्व सैनिकों के 2312 पद अभ्यर्थी न मिलने से जो खाली हैं उन्हें मेरिट के आधार पर सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों से भरा जाए।
आरोप है कि भर्ती बोर्ड ने 10 अप्रैल 2018 को 13479 अभ्यर्थियों को चिकित्सा परीक्षण और दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बुलाया। लेकिन बोर्ड ने तीन दिन बाद ही इसे बदल दिया और सिर्फ उन लोगों की सूची वेबसाइट पर डाल दी जिन अभ्यर्थियों ने न्यायालय में अपील की थी।
मामला फिर कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने कहा कि मेरिट के आधार पर रिक्त पद भरे जाएं। 13 अगस्त 2018 को न्यायालय के आदेश के बाद 8678 अभ्यर्थियों की एक और सूची भर्ती बोर्ड की ओर से जारी की गई। अगस्त और सितंबर में इनका चिकित्सा परीक्षण भी पूरा करा लिया गया।
मनोज कुमार की याचिका के अनुपालन में 2427 सीटों के स्थान पर 2052 महिला सिपाहियों के पद भरे गए हैं। वहीं, उपेंद्र तोमर के मामले में सिर्फ 36 पद भरे गए हैं। सुभाष का कहना है कि वे इस परिणाम को कोर्ट में चुनौती देंगे।